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प्रभु के बजट से देहरादून को आस

Thu, 11 Feb 2016 04:52 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट / अमर उजाला, देहरादून
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एक बार फिर ‘प्रभु’ संसद में रेल बजट पेश करने वाले हैं। दूनवासी भी बेसब्री से रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पिटारे से कुछ मिलने की आस बांधे हुए हैं कि यहां रेल की गाड़ी कुछ आगे खिसकेगी।
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पिछले कई साल में दून में रेल सेवा के विस्तार की कई घोषणाएं हुईं। उनमें ज्यादातर योजनाएं सिर्फ घोषणाओं तक सिमट कर रह गई। दून में रेल सेवाओं में विस्तार यात्रियों की सुविधा के साथ ही पर्यटन, शिक्षा, आर्थिकी आदि क्षेत्रों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है, इस पर अमर उजाला बजट पेश होने तक सीरीज के रूप में खबरें प्रकाशित करेगा।

स्टेशन छोटा होने से दून नहीं आती कई ट्रेनें
दून स्टेशन का विस्तार नहीं होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। प्लेटफार्म की सामान्य क्षमता 13 कोच वाली ट्रेन की है। कई सालों से रेलवे इसे एक कोच भी आगे नहीं बढ़ा पाया है। वर्तमान में दून स्टेशन पर चार प्लेटफार्म हैं।
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देहरादून-नई दिल्ली के बीच चलने वाली एकमात्र शताब्दी एक्सप्रेस ऐसी गाड़ी है जो 14 कोच की है। शताब्दी एक्सप्रेस को भी तीन नंबर प्लेटफार्म पर आकर वहीं से लौटना पड़ता है। दोपहर के वक्त करीब पांच घंटे शताब्दी इसी प्लेटफार्म पर खड़ी रहती है। जिससे इस प्टेलटफार्म पर पांच घंटे कोई दूसरी गाड़ी नहीं आ सकती।

प्लेटफार्म और यार्ड छोटे और सीमित संख्या में होने का नतीजा यह है कि 13 कोच से अधिक की ट्रेन लाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि 18 कोच की 13 ट्रेनों को आज तक दून तक चलाने पर बात आगे नहीं बढ़ पाई है। 18 कोच की अहमदाबाद मेल, पंजाब मेल, उत्कल एक्सप्रेस, जम्मूतवी और हावड़ा से आने वाली कुंभ एक्सप्रेस आदि महत्वपूर्ण रूट की ट्रेनें हरिद्वार से लौट जाती हैं।

यह होती है परेशानी
पर्यटन सीजन और स्कूलों की छुट्टियों के दौरान दून स्टेशन से संचालित ट्रेनों में वेटिंग फुल हो जाती है। सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रेलवे देश भर के विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने का दावा करता है।

जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ट्रेन चलाने का दावा भी किया जाता है। लेकिन दून स्टेशन पर आकर यह दावा दम तोड़ जाता है। कई बार यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद रेलवे गाड़ियों में कोच नहीं बढ़ा पाता।

प्लेटफार्म का विस्तार करने की यूनियन लंबे समय से मांग कर रही है। मुरादाबाद मंडल से लेकर रेल मंत्रालय तक यह मांग की गई है। बजट नजदीक देखते एक बार फिर मंत्रालय से रेल सेवाओं में विस्तार की मांग की जाएगी।
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- उग्रसेन सिंह, ब्रांच सेक्रेटरी नार्दर्न रेलवे मैंस यूनियन
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