फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...तो राधे मां पर 'बड़ा' फैसला लेगा उनका अखाड़ा

Sun, 09 Aug 2015 01:04 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि राधे मां को जूना अखाड़े ने निलंबित कर दिया गया था। वह अब तक निलंबित ही हैं।
विज्ञापन


अखाड़े ने अभी उनको बर्खास्त नहीं किया है। बर्खास्तगी का निर्णय अखाड़े की कार्यकारिणी ले सकती है। गौरतलब है कि शनिवार को खबर फैली थी कि राधे मां को जूना अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है।

टेलीफोन पर दिल्ली से स्वामी अवधेशानंद गिरि ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व प्रकरण सामने आने के बाद अखाड़े ने राधे मां को निलंबित कर दिया था। निलंबन कर जांच समिति गठित की गई थी। जिसकी रिपोर्ट अखाड़े की कार्यकारिणी के पास है।
विज्ञापन


रिपोर्ट पर कार्यकारिणी को ही फैसला करना है। निर्णय होने तक राधे मां निलंबित रहेंगी और जूना अखाड़े अथवा कुंभ के किसी आयोजन में अखाड़े के साथ भाग नहीं लेंगी।

गौरतलब है कि जूना अखाड़े ने 31 जुलाई 2012 की आधी रात में राधे मां को चुपचाप हरिद्वार के अखाड़े में महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी। इसकी खबर जब संत जगत को लगी तो रोष जताया गया। अखाड़े की कार्यकारिणी के बाद राधे मां को निलंबित कर दिया गया था।

चर्चा है कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में राधे मां को क्लीनचिट दी थी। इसके बावजूद अखाड़े ने अभी तक उनके पद को निलंबित ही रखा है। विवादों में आईं राधे मां के बारे में अंतिम फैसला इस समय नासिक में मौजूद अखाड़े की कार्यकारिणी ले सकती है।
विज्ञापन

पीठों को लेकर झगड़े, अखाड़ों में कैसे होगा सुधार

हरिद्वार में अखाड़ों और षड्दर्शन संतों के शुद्धिकरण की बात इन दिनों चल रही है। जिन जगद्गुरुओं पर नियंत्रित करने की जिम्मेदारी है वह भी विवादों में फंसे हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के विपरीत इस समय जगद्गुरुओं की कई पीठें चल रही हैं। जब शीर्षतम पीठों के मामले ही अदालतों में हैं, तो अखाड़ों में सहज सुधार की कल्पना नहीं की जा सकती।

आद्य शंकराचार्य ने ज्योर्ति, शारदा, शृंगेरी और गोवर्धन पीठों की स्थापना की थी। इन्हीं चार पीठों पर जगद्गुरु शंकराचार्य के पद हैं। पांचवीं अधिकृत पीठ कांची कामकोटि की है जो आदि शंकर के तप से जुड़ी हुई है।

यह जानकर हैरानी होगी कि इस समय जगद्गुरु शंकराचार्य के नाम से देश में करीब 22 पीठ चल रही हैं। स्थापित चार पीठों पर ही कई-कई शंकराचार्य विराजमान हैं। यह सब उन विद्वत परिषदों की कृपा से चल रहा है जो शंकराचार्य पद पर संतों का चयन करती हैं।

बैरागियों की जगद्गुरु रामानंदाचार्य पीठ केवल काशी में है। यह एक ही पीठ है जो हरिद्वार की महापीठ से भी जुड़ी हुई है। इसी भांति जगद्गुरु रामानुजाचार्य की एकमात्र पीठ वृंदावन में है।

इस समय देश में कई संत अपने नाम से पूर्व जगद्गुरु रामानंदाचार्य अथवा जगद्गुरु रामानुजाचार्य अलंकरण का प्रयोग कर रहे हैं। अकेले हरिद्वार में तीन संत जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विराजमान हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें