जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि राधे मां को जूना अखाड़े ने निलंबित कर दिया गया था। वह अब तक निलंबित ही हैं।
अखाड़े ने अभी उनको बर्खास्त नहीं किया है। बर्खास्तगी का निर्णय अखाड़े की कार्यकारिणी ले सकती है। गौरतलब है कि शनिवार को खबर फैली थी कि राधे मां को जूना अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है।
टेलीफोन पर दिल्ली से स्वामी अवधेशानंद गिरि ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व प्रकरण सामने आने के बाद अखाड़े ने राधे मां को निलंबित कर दिया था। निलंबन कर जांच समिति गठित की गई थी। जिसकी रिपोर्ट अखाड़े की कार्यकारिणी के पास है।
रिपोर्ट पर कार्यकारिणी को ही फैसला करना है। निर्णय होने तक राधे मां निलंबित रहेंगी और जूना अखाड़े अथवा कुंभ के किसी आयोजन में अखाड़े के साथ भाग नहीं लेंगी।
गौरतलब है कि जूना अखाड़े ने 31 जुलाई 2012 की आधी रात में राधे मां को चुपचाप हरिद्वार के अखाड़े में महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी। इसकी खबर जब संत जगत को लगी तो रोष जताया गया। अखाड़े की कार्यकारिणी के बाद राधे मां को निलंबित कर दिया गया था।
चर्चा है कि जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में राधे मां को क्लीनचिट दी थी। इसके बावजूद अखाड़े ने अभी तक उनके पद को निलंबित ही रखा है। विवादों में आईं राधे मां के बारे में अंतिम फैसला इस समय नासिक में मौजूद अखाड़े की कार्यकारिणी ले सकती है।