मुंबई की बहुचर्चित संत राधे मां उज्जैन कुंभ में नहीं जा पाएंगी। जूना अखाड़े ने अब उनसे पूरी तरह किनारा कर लिया है।
अखाड़े द्वारा प्रदत्त महामंडलेश्वर पद हमेशा के लिए निलंबित रहेगा। जूनापीठाधीश्वर की स्पष्ट पहल के बाद अब उस एकमात्र संत के प्रयास भी ठंडे पड़ गए हैं जो पहले नासिक और अब उज्जैन में राधे मां को महामंडलेश्वर के रूप में ले जाने का प्रयास कर रहे थे।
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी कई बार स्पष्ट कर चुके है कि राधे मां को महामंडलेश्वर बनाना अखाड़े की भूल थी। बनाने के दो दिन बाद ही भूल सुधार करते हुए उनका पद निलंबित कर दिया गया था। उसके बाद राधे मां ने पहले प्रयाग कुंभ और फिर नासिक कुंभ में जाने का भरपूर प्रयास किया।