गुरु रविंद्र नाथ टैगोर के बहुआयामी व्यक्तित्व को जानने वालों के लिए अच्छा मौका है। देहरादून के एमकेपी पीजी कॉलेज में प्रदर्शनी शुरु हो गई है।
प्रदर्शनी आम जनता के लिए खुली
प्रदर्शनी में पहले दिन टैगोर की वह बोट आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें बैठकर वह सागर के बीच बेहद सुकून और शांति के बीच कृतियां रचते थे। यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खुली है।
मंगलवार को एमकेपी में प्रदर्शनी का शुभारंभ अपर सचिव ज्योति नीरज खैरवाल और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट के निदेशक डॉ. पीआर गोस्वामी ने किया।
ट्रांसलेशन के कवर भी प्रदर्शनी में अहम
प्रदर्शनी में गुरु रविंद्र के जीवन आदर्शों, उनकी सोच, फिलॉसफी, सामाजिक व राजनैतिक पैठ को पेश किया गया है। टैगोर के राष्ट्रीय आंदोलनों में भूमिकाओं, 69 वर्ष में होने पर उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग भी आकर्षण का केंद्र है।
मॉडर्न आर्ट को उन्होंने जो ऊंचाईयां दी, वह भी उनकी पेंटिंग में देखने को मिलती है। गुरु रविंद्र नाथ की कृति गीतांजली की हर पंक्ति के ट्रांसलेशन के कवर भी प्रदर्शनी में अहम हैं।
टैगोर के आइंस्टाइन से मुलाकात को भी यहां प्रदर्शित किया गया है। एमकेपी प्राचार्य डॉ. इंदु सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी 16 मार्च तक चलेगी। सभी पेंटिंग दिल्ली के म्यूजियम से लाई गई हैं।