पिछले पांच सालों से आर्किड पार्क और एमिनेंट हाइट्स के फ्लैट पाने के लिए 90 खरीदार लड़ाई लड़ रहे हैं। इस संपत्ति को बैंक का बकाया होने के कारण ईडी ने अटैच कर लिया है। खरीदार मांग कर रहे हैं कि सेक्शन-8 का प्रयोग कर नोएडा के आम्रपाली प्रोजेक्ट की तरह पुष्पांजलि के इन प्रोजेक्ट को किसी अन्य बिल्डर को सौंपा जाए।
लंबे इंतजार के बाद पुष्पांजलि प्रोजेक्ट प्रकरण में दीपक मित्तल के पिता अश्वनी मित्तल और अन्य की गिरफ्तारी होने से फ्लैट खरीदारों को बड़ी उम्मीद जगी है। खरीदारों का कहना है कि 90 लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदे थे, जो ईडी के अटैच करने के कारण फंसे पड़े हैं।
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खरीदारों की मांग है कि मित्तल दंपती और उनके परिवार के लोगों की सभी संदिग्ध संपत्तियां अटैच की जाएं। उसका मूल्यांकन करते हुए खरीदारों का पैसा ब्याज समेत लौटाया जाए या अधूरे पड़े फ्लैट को मुक्त कर उस पर निर्माण की अनुमति किसी अन्य बिल्डर को मिले। गौरतलब हो कि पिछले पांच सालों से आर्किड पार्क और एमिनेंट हाइट्स के फ्लैट पाने के लिए 90 खरीदार लड़ाई लड़ रहे हैं।
इस संपत्ति को बैंक का बकाया होने के कारण ईडी ने अटैच कर लिया है। खरीदार मांग कर रहे हैं कि सेक्शन-8 का प्रयोग कर नोएडा के आम्रपाली प्रोजेक्ट की तरह पुष्पांजलि के इन प्रोजेक्ट को किसी अन्य बिल्डर को सौंपा जाए। ईडी की ओर से अटैच किए गए प्रोजेक्ट को मुक्त किया जाए। यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, लेकिन यहां पर याचिका खारिज कर दी गई।
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संपत्ति को अटैच कर अधूरे फ्लैट को मुक्त किया
हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रकरण रेरा के कार्यक्षेत्र का है। उधर, दीपक मित्तल के पिता की गिरफ्तारी होने से खरीदारों को उम्मीद जगी है कि जल्द इस मामले में कोई बड़ी कामयाबी मिल सकती है। इसलिए खरीदारों ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। खरीदारों की ओर से लड़ाई लड़ रहीं कविता भाटिया ने कहा कि दीपक मित्तल, उनकी पत्नी और पिता की संपत्ति को जोड़ लिया जाए तो खरीदारों की रकम आसानी से निकल सकती है। इसलिए पूरी संपत्ति को अटैच कर अधूरे फ्लैट को मुक्त किया जाए या खरीदारों की 40 करोड़ की रकम को मयब्याज लौटाया जाए।
ईडी ने मनी लाॅड्रिंग के आरोपों की जांच करने के लिए बिल्डर की संपत्ति को अटैच किया है। अभी अन्य संपत्तियों को अटैच करने के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है। आगे जैसा भी निर्णय जांच एजेंसियां लेंगी, उसके मुताबिक कार्य किया जाएगा। - मठपाल सिंह, सदस्य, रेरा