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उत्तराखंड सत्ता परिवर्तन : एक थका हुआ, दूसरा सांविधानिक संकट में फंसा और तीसरा अनुभवहीन सीएम - कांग्रेस

Mon, 05 Jul 2021 10:10 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि पिछले चार वर्षों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जो संघर्ष किया है, उसके बल पर ही कंग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में बहुमत की सरकार बनाएगी।
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना
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विस्तार
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प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व ने प्रदेश को साढ़े चार सालों में तीन मुख्यमंत्री दिए हैं, जिसमें एक थका हुआ, दूसरा सांविधानिक संकट में फंसा हुआ और अब तीसरा अनुभवहीन है। 

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कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री के कारण भाजपा में उपजे असंतोष और राजनीतिक उठापटक से कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है। यह सब भाजपा के कुकर्मों का फल है, जो उसे भुगतना पड़ेगा।
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धस्माना ने कहा कि पिछले चार वर्षों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जो संघर्ष किया है, उसके बल पर ही कंग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में बहुमत की सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एक सुलझे हुए मुख्यमंत्री की जरूरत थी और भाजपा ने पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की कमान दे दी है।

राज्य में वर्ष 2017 में कांग्रेस सरकार के दौरान बेरोजगारी दर 1.64 प्रतिशत थी, जो अब 10.99 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसमें छह गुना की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमणकाल में सात हजार लोगों की आधिकारिक मौतें हुई हैं। ब्लैक फंगस से सौ लोगों की मौत हुई।

इससे पता चलता है कि राज्य सरकार के स्वास्थ्य इंतजाम नाकाफी हैं। महंगाई आज चरम पर है। भाजपा ने प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात किया है। कांग्रेस आगामी सात से 17 जुलाई तक प्रदेशभर में बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता, महंगाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ आंदोलन छेड़ने जा रही है, जिसकी रणनीति तैयार कर ली गई है।

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उत्तराखंड को किस बात का दंड, क्या अपार बहुमत देने का: रावत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत ने उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन पर अपने अंदाज में चुटकी ली है। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा है कि वह कल से कुछ सुगबुगाहटें सुन रहे हैं। चिंता यह नहीं है कि भाजपा के अंदर क्या होता है, उनका नाइट वॉचमैन बिना रन बनाए आउट होता है या कुछ देर टुक-टुक करता है, बल्कि उनकी चिंता यह है कि उत्तराखंड को किस बात का दंड दिया जा रहा है, क्या अपार बहुमत देने का?

उन्होंने कहा कि नए सीएम और उनकी पार्टी के पास यह अंतिम अवसर है कि वे 2017 के अपने चुनावी घोषणा पत्र को खोलें क्योंकि लगता नहीं है कि पहले के दोनों मुख्यमंत्री चुनावी घोषणा पत्र को खोल पाए हैं। यदि पुष्कर सिंह धामी चुनावी घोषणा पत्र को खोल लेते हैं तो उन्हें एक अच्छा विद्यार्थी माना जाएगा।

हरीश रावत के अनुसार जहां कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग का एक शर्मनाक घोटाला हो गया हो, विकास कार्य ठप पड़े हुए हों, अपराधों की वृद्धि दर सर्वाधिक हो, उस राज्य के नवागंतुक मुख्यमंत्री के लिए बहुत सारी चुनौतियां हैं। 

हरीश रावत के अनुसार वह पुष्कर सिंह धामी से कहना चाहेंगे कि मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री होता है, वह कितनी ही अवधि का मुख्यमंत्री हो। यदि उसमें निर्णय लेने की संकल्प शक्ति है तो निर्णय लिए जाते हैं। रावत ने लिखा है कि उनका किसी भी भाजपाई के साथ कोई सॉफ्ट कॉर्नर नहीं रहता है, लेकिन नौजवान के साथ जरूर सॉफ्ट कॉर्नर है।

एक नौजवान को मौका मिला है वह कुछ तो चमक दिखाएं और यदि कुछ भी चमक नहीं दिखा पाए तो उत्तराखंड के हजारों-हजार नौजवानों को घोर निराशा होगी।
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