कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत ने उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन पर अपने अंदाज में चुटकी ली है। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा है कि वह कल से कुछ सुगबुगाहटें सुन रहे हैं। चिंता यह नहीं है कि भाजपा के अंदर क्या होता है, उनका नाइट वॉचमैन बिना रन बनाए आउट होता है या कुछ देर टुक-टुक करता है, बल्कि उनकी चिंता यह है कि उत्तराखंड को किस बात का दंड दिया जा रहा है, क्या अपार बहुमत देने का?
उन्होंने कहा कि नए सीएम और उनकी पार्टी के पास यह अंतिम अवसर है कि वे 2017 के अपने चुनावी घोषणा पत्र को खोलें क्योंकि लगता नहीं है कि पहले के दोनों मुख्यमंत्री चुनावी घोषणा पत्र को खोल पाए हैं। यदि पुष्कर सिंह धामी चुनावी घोषणा पत्र को खोल लेते हैं तो उन्हें एक अच्छा विद्यार्थी माना जाएगा।
हरीश रावत के अनुसार जहां कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग का एक शर्मनाक घोटाला हो गया हो, विकास कार्य ठप पड़े हुए हों, अपराधों की वृद्धि दर सर्वाधिक हो, उस राज्य के नवागंतुक मुख्यमंत्री के लिए बहुत सारी चुनौतियां हैं।
हरीश रावत के अनुसार वह पुष्कर सिंह धामी से कहना चाहेंगे कि मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री होता है, वह कितनी ही अवधि का मुख्यमंत्री हो। यदि उसमें निर्णय लेने की संकल्प शक्ति है तो निर्णय लिए जाते हैं। रावत ने लिखा है कि उनका किसी भी भाजपाई के साथ कोई सॉफ्ट कॉर्नर नहीं रहता है, लेकिन नौजवान के साथ जरूर सॉफ्ट कॉर्नर है।
एक नौजवान को मौका मिला है वह कुछ तो चमक दिखाएं और यदि कुछ भी चमक नहीं दिखा पाए तो उत्तराखंड के हजारों-हजार नौजवानों को घोर निराशा होगी।