उत्तराखंड सरकार में बजट का 43 फीसदी वेतन, भत्तों व पेंशन पर खर्च हो जाता है। इस साल सरकार ने 57400.32 करोड़ का बजट पास किया है। इसका 29.58 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन और 13.03 प्रतिशत पेंशन व अन्य पर खर्च का अनुमान है। ऐसे हालात में विकास एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए सरकार पूरी तरह से केंद्र पोषित योजनाओं पर ही निर्भर होती है। बजट में ही सरकार ने 35.83 प्रतिशत आय का अनुमान केंद्रीय सहायता के रूप में दिखाई है।
कोविड से चौपट आर्थिकी को पटरी लाने की चुनौती
कोरोना की दूसरी लहर में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ चारधाम यात्रा अब तक शुरू नहीं हो पाई है। पर्यटन कारोबार पिछले दो महीने से ठप रहा। तीर्थांटन व पर्यटन कारोबार से जुड़े छोटे से लेकर बड़े कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार के सामने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के साथ नुकसान उठाने वाले लोगों के जख्मों पर राहत पैकेज का मरहम भी लगाना होगा। लेकिन कोविडकाल में सरकार की आमदनी पर गहरी चोट लगी है। ऐसे हालात में सरकार राहत पैकेज के लिए धन कहां से जुटाएगी, यह बड़ा सवाल है।
कितना उठा पाएंगे डबल इंजन का फायदा
चुनावी साल में विकास की रफ्तार को तेज करना भाजपा सरकार की राजनीतिक मजबूरी भी है। चुनाव में विपक्षी दल उससे डबल इंजन से मिले लाभ का हिसाब-किताब भी पूछेंगे। नए मुखिया के सामने अब यह चुनौती होगी कि वह केंद्र सरकार से राज्य के विकास के लिए कितनी इमदाद और सहायता हासिल कर पाते हैं। त्रिवेंद्र और तीरथ भी केंद्रीय नेताओं के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक राज्य की झोली में केंद्र की नेमत नहीं बरसी है।