मोहब्बेवाला स्थित टाइटन कंपनी को देहरादून से भगवानपुर शिफ्ट करने के विरोध में 110 कर्मचारी आंदोलन पर उतर आए हैं। रातभर वह कंपनी में ही धरने पर बैठे रहे। इस बीच खाना न खाने से तीन कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
करीब 22 घंटे चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद सुलह के लिए कंपनी ने एक सप्ताह का समय मांगा तो कर्मचारी वहां से हटे। दिनभर आंदोलनकारी कर्मचारियों के परिजन अपनों का इंतजार करते रहे, लेकिन किसी को भी भीतर नहीं जाने दिया गया।
एक सप्ताह पहले टाइटन कंपनी ने सभी कर्मचारियों को बताया कि कंपनी रुड़की में शिफ्ट होने जा रही है। इसलिए या तो वह उनके साथ रुड़की जाएं या फिर नौकरी छोड़ दें। शाम को पांच बजे तक काम करने के बाद कर्मचारी इस आदेश के खिलाफ धरने पर बैठ गए।
कुछ कर्मचारियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। रातभर कर्मचारी कंपनी में ही रहे। सुबह अचानक तीन कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। कंपनी में करीब 110 कर्मचारी हैं, जिनमें करीब 15 दिव्यांग कर्मी भी शामिल हैं।
इनमें ज्यादातर संख्या महिलाओं की है। कर्मचारियों के पास फोन न होने की वजह से उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई। कई परिजन पहले बुधवार रात 11 बजे तक फिर बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे से दोपहर तीन बजे तक कंपनी के बाहर ही इंतजार करते रहे। कंपनी के अधिकारियों ने परिजनों को गेट के अंदर तक घुसने नहीं दिया।
मामला बढ़ता देख दोपहर करीब दो बजे सिटी मजिस्ट्रेट चंद्र सिंह मार्तोलिया और आईएसबीटी चौकी इंचार्ज आशीष गुसाईं कंपनी के अंदर पहुंचे। एक घंटे बाद प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी बाहर आ गए।
महिला कर्मियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी ने उनकी मांगों पर सुलह बनाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है, इसलिए फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। मामले में कंपनी के अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
कंपनी के गेट के बाहर पत्नी का इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने बताया कि रुड़की स्थित भगवानपुर में जहां कंपनी कर्मियों को शिफ्ट करने की बात चल रही है, वहां महिलाओं की सुरक्षा को लेकर खतरा है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पहले ही कंपनी की ओर से यह अल्टीमेटम मिला है, ऐसे में उनके बच्चों की स्कूलिंग पर भी प्रभाव पड़ेगा।
कर्मियों को मीडिया से दूर रहने की हिदायत
प्रदर्शन के बाद कर्मचारी जब बाहर आ रहे थे तो कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें मीडिया से बातचीत न करने की हिदायत दी। इतना ही नहीं सभी कर्मचारियों का नाम और घर के पते लिखित में लिए गए। फिर उन्हें जाने दिया गया।
मामला यूनिट कर्मियों को देहरादून से रुड़की शिफ्ट करने का है, जिसे कर्मचारी नहीं मान रहे थे। अब कंपनी के अधिकारियों ने मामले में सुलह के लिए एक सप्ताह तक का समय मांगा है। जिसके बाद कर्मचारियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।
-चंद्र सिंह मार्तोलिया, सिटी मजिस्ट्रेट, देहरादून
हमें किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली थी। इस मामले में श्रम विभाग के प्रयासों से कंपनी और कर्मचारियों का आपस में ही निपटारा हो गया।
-अजय सिंह, एसपी सिटी, देहरादून