एक समान पेंशन, सरकारी नौकरी में दस फीसदी आरक्षण और राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा देने की मांग पर राज्य आंदोलनकारियों ने सचिवालय पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन पहुंचा दिया। देर शाम उन्हें रिहा किया गया।
पुलिस से धक्का मुक्की
उत्तराखंड चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संगठन के बैनर तले बुधवार को कचहरी स्थित शहीद स्मारक से आंदोलनकारी सचिवालय की ओर निकले। पुलिस ने उन्हें मीडिया सेंटर के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। इस दौरान आंदोलनकारियों की पुलिस से धक्कामुक्की भी हुई। बाद में आंदोलनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
नौ नवंबर से कर रहे आंदोलन
संगठन के महामंत्री जबर सिंह पावेल ने कहा कि आंदोलनकारी नौ नवंबर से आंदोलन पर हैं। सीएम आवास कूच के अलावा जाम भी लगाया जा चुका है, लेकिन सरकार अनदेखी कर रही है। कैबिनेट बैठक से पहले सरकार ने आश्वासन भी दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। प्रदर्शनी में जितेंद्र चौहान, जबर सिंह पावेल, प्रमिला रावत, सुलोचना भट्, जानकी, बलवीर सिंह नेगी, भुवनेश्वरी नेगी, नर्मदा नेगी, उषा आदि शामिल रहे।
31 मार्च तक बढ़ी चिह्नीकरण तिथि
राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के लिए लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण की अंतिम तिथि 31 मार्च 2014 तक बढ़ा दी गई है। प्रमुख सचिव गृह ओमप्रकाश ने बताया कि यह तिथि 31 मार्च 2013 तक निर्धारित की गई थी। अब अंतिम तिथि तक सभी जिलाधिकारियों को लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी।