दारोगाओं की इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति वरिष्ठता विवाद में उलझ गई है। पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू के कार्यकाल में 65 दारोगाओं को वरिष्ठता दिए जाने से यह विवाद खड़ा हुआ है। शासन ने उस आदेश को तो निरस्त कर दिया है, लेकिन अब शासन को ही यह फैसला लेना है कि रेंकर और सीधी भर्ती के दारोगाओं में वरिष्ठ कौन है।
वरिष्ठता को लेकर दारोगाओं में तलवारें खिंची हुई है। वरिष्ठता की इसी लड़ाई में तीन साल से दारोगाओं को पदोन्नति नहीं मिल पाई है।
प्रमोशन से भरे जाते हैं इंस्पेक्टर के पद
बता दें कि पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर की सीधी भर्ती के बजाय प्रमोशन प्रक्रिया से इन पदों को भरा जाता है। इंस्पेक्टरों के सेवानिवृत्त होने और कई इंस्पेक्टरों के पदोन्नति पाकर पुलिस उपाधीक्षक बन जाने के कारण प्रदेश में इंस्पेक्टरों के पद खाली चल रहे हैं।
पुलिस विभाग ही नहीं सीबीसीआईडी और विजिलेंस का काम भी इंस्पेक्टरों की कमी की वजह से प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठता का यह विवाद 118 दारोगाओं के तीन स्टार लगाने यानि इंस्पेक्टर बनने के सपने को साकार करने में रोड़ा बन रहा है।
यह है वरिष्ठता का विवाद
2007 में ट्रेनिंग करने वाले रेंकर दारोगा लंबे समय से 2001 की वरिष्ठता की लड़ाई लड़ रहे थे। यह मामला हाईकोर्ट तक गया। इसी बीच प्रदेश में सियासी संकट के दौरान अप्रैल माह में तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू के कार्यकाल में 65 दारोगाओं को 2001 की वरिष्ठता दे दी गई थी। 2002 में सीधे भर्ती के दारोगाओं ने वरिष्ठता को चुनौती देते हुए शासन में प्रत्यावेदन किया था। राष्ट्रपति शासन में मुख्य सचिव ने उस आदेश का निरस्त कर दिया था। हाल में ही शासन ने वरिष्ठता को लेकर दोनों पक्षों के प्रत्यावेदन लिए थे। शासन को ही अब उनकी वरिष्ठता का फैसला करना है।
डीआईजी का है कहना
दारोगाओं की वरिष्ठता तय होने के साथ पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 118 दारोगाओं को पदोन्नति मिलने से इंस्पेक्टरों की कमी भी पूरी हो जाएगी। फिलहाल वरिष्ठता का यह मामला शासन में विचाराधीन है। पुलिस मुख्यालय का प्रयास है कि जल्द से जल्द यह मामला तय हो पाए।
-राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन।