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'गंगा तट से देश को मिलेगा नया पैगाम'

Sun, 30 Nov 2014 01:29 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
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ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस (जीवा) और गंगा एक्शन परिवार के तत्वावधान में दो दिवसीय इंटरनेशनल वर्शिप टू वॉश समिट विधिवत शुरू हो गई।
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गंगा और हिमालय को धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक
जिसमें विभिन्न धर्मों के आध्यात्मिक गुरु, यूनिसेफ और कई स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं। कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गंगा और हिमालय को धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक बताया।

कहा कि गंगा तट से सर्वधर्म समभाव की इस नई गंगा के संदेश से मोक्षदायिनी भी निर्मल होगी और स्वच्छ भारत का निर्माण भी होगा।

इस मौके पर दुनियाभर से जुटे धर्म गुरुओं ने नई पीढ़ी को पानी और हवा को शुद्ध रखने के साथ ही स्वस्थ विश्व के निर्माण में सहभागिता का संकल्प लिया।

शनिवार को आश्रम के गंगा घाट पर पूर्वाह्न में इंटरनेशनल सम्मेलन के आगाज के अवसर पर सीएम रावत ने कहा कि जिस तरह से निर्मल गंगा और स्वच्छ भारत मिशन के लिए सभी धर्मों के गुरु एक मंच पर जुटे हैं, इस धर्म संसद से देश और दुनिया में एक संदेश जाएगा, जो बेहतर भारत के निर्माण के लिए विशेष है।
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सीएम हरीश रावत ने कहा कि गंगा स्वच्छता मिशन की प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय पहल हुई थी। वर्तमान में पीएम नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन का आह्वान कर रहे हैं। उनका कहना था कि अभियानों के नामों में परिवर्तन हो सकता है, मगर सबका मकसद एक है। कहा कि राज्य सरकार गंगा की निर्मलता और स्वच्छता के प्रति कृत संकल्पित प्रयासों में जुटी है।

विदेशों में नदियों की पूजा नहीं होती...
विदेशों में नदियों की पूजा नहीं होती, मगर वहां नदियां मैली भी नहीं होती। जबकि भारत में गंगा समेत तमाम नदियां देवतुल्य हैं, जो पूजी जाती हैं, मगर इन नदियों में कीचड़, गंदगी डाली जाती है। यह शर्मनाक बात है। हमें अपनी नदियों को पाकसाफ रखना चाहिए, प्रकृति और पवित्र नदियों की स्वच्छता जरूरी है।
- डॉ. कल्बे सादिक, तौहिदुल मुस्लमीन ट्रस्ट के फाउंडर

धर्म गुरु लें 10-10 गांव गोद...
स्वच्छ भारत के लिए सांसद एक-एक गांव गोद ले रहे हैं। ऐसे में धर्म गुरुओं को 10-10 गांवों को गोद लेना चाहिए। संपूर्ण देश अपने आप स्वच्छ हो जाएगा। धर्म संसद से देश के अंतिम व्यक्ति तक नदियों और पर्यावरण की स्वच्छता का संदेश जाएगा। देश में अभावग्रस्त लोगों को भोजन और वस्त्र देकर जीवनस्तर ऊंचा करने की आवश्यकता है। आज वायु और जल में ही प्रदूषण नहीं, बल्कि हर वस्तु में मिलावट हो रही है। यह गंभीर चिंता का विषय है।
- हरिचेतनानंद, महामंडलेश्वर

जल-जंगल बचाएं, बोनस पाएं
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड में जल और पर्यावरण संरक्षण की योजना शुरू की है। इसमें सहभागिता निभाने वाले राज्यवासियों को सरकार ग्रीन और वाटर बोनस देगी।

उन्होंने केंद्र सरकार को हरिद्वार तक गंगा को शत प्रतिशत स्वच्छ रखने का भरोसा दिलाते हुए दस हजार करोड़ की सहायता मांगी है। कहा कि सरकार के स्तर पर इस दिशा में कदम उठाए गए हैं।

परमार्थ निकेतन में आयोजित धर्म संसद में प्रतिभाग के दौरान सीएम ने कहा कि देश में गरीबी और कुपोषण के रहते हुए स्वच्छ भारत का उद्देश्य अधूरा है। लिहाजा सरकार को दोहरी चुनौती पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी और सर्दियों में नदियों में जल की कमी को पूरा करने के लिए एक्शन प्लान पर वन विभाग को कार्रवाई के लिए कहा गया है। इसके लिए लोगों को जल संरक्षण के लिए चाल-खाल निर्माण करने को कहा गया है।

इसके तहत तीन साल में एक लाख पौंड चाल खाल तैयार की जाएंगी। जिससे स्थानीय नदियां, धारे और जलस्रोत रिचार्ज होंगे। ऐसा करने वाले लोगों को सरकार वाटर बोनस देगी। जबकि ग्रीनिंग के तहत लोगों को बंजर खेतों में चौड़ी पत्ती के चार वृक्ष लगाने को कहा गया है, जिन्हें सरकार मुफ्त उपलब्ध कराएगी।

ऐसे लोग अपना पंजीकरण कराएंगे, उन्हें सरकार प्रति वृक्ष 300 रुपए ग्रीन बोनस देगी।

एक सत्र, दो उद्घाटन, दो बार संकल्प
परमार्थ निकेतन में आयोजित धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में दो बार दीप प्रज्ज्वलित किए गए तो दो बार ही नदियों के संरक्षण और भारत स्वच्छता का संकल्प लिया गया।

शनिवार को सुबह का सत्रारंभ करते हुए मंचासीन धर्म गुरुओं ने दीप प्रज्ज्वलित किया। कुछ देर बाद मुख्य अतिथि हरीश रावत पहुंचे। इसके बाद उनकी अगुवाई में सभी धर्म गुरुओं से दोबारा दीप प्रज्ज्वलित कराया गया।
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