प्रदेश के ज्यादातर स्थानों में प्राइवेट अस्पताल मरीजों को डेंगू का डर दिखाकर लूट रहे हैं। केवल रेपिड टेस्ट के आधार पर वह मरीजों को डेंगू पीड़ित बता रहे हैं। साथ ही प्लेटलेट्स घटने पर भी डेंगू होने का डर दिखाया जा रहा है। जबकि सामान्य वायरल बुखार में भी यह स्थिति हो सकती है।
मरीजों को चाहिए कि बिना एलाइजा टेस्ट करवाए वह ऐसे किसी भी भ्रम का शिकार ना हों। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. कुसुम नरियाल ने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेते हुए इस संबंध में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
डेंगू की समीक्षा बैठक लेते हुए उन्होंने डेंगू से बचाव व नियंत्रण के लिए निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आभा ममगाईं, अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एसपी अग्रवाल व राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. किरन बिष्ट को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मरीज प्राइवेट अस्पतालों में उपचार कराने पहुंच रहे हैं, जिन्हें भ्रमित कर डेंगू पीड़ित होने की जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों को रेपिड टेस्ट के आधार पर मरीज को डेंगू पीड़ित ना बताने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को अस्पतालों के इस रवैये पर रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि डेंगू की प्रमाणिक एलाइजा जांच की सुविधा केवल दून अस्पताल और हिमालयन अस्पताल में ही उपलब्ध है।
उन्होंने देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में फॉगिंग व अन्य डेंगू नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए अलग बजट तत्काल जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सभी प्रमुख चिकित्सालयों में डेंगू रोगियों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।