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निजी अस्पतालों में हड़ताल से मरीज हलकान, इमरजेंसी और ओपीडी समेत सभी सेवाएं ठप

Fri, 15 Feb 2019 10:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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निजी अस्पतालों की हड़ताल
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संशोधित क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने और वन टाइम सेटलमेंट स्कीम में छूट की मांग को लेकर प्रदेशभर के निजी अस्पतालों ने शुक्रवार से हड़ताल शुरू कर दी। ज्यादातर निजी अस्पतालों ने खुद ही तालाबंदी कर इमरजेंसी, ओपीडी और मरीज भर्ती करने समेत सभी सेवाएं ठप रखीं। तालाबंदी से मरीजों को खासी फजीहत झेलनी पड़ी।

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भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के अधीन प्रदेशभर के अधिकांश निजी अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालकों ने शुक्रवार को तालाबंदी कर विरोध जताया। राजधानी देहरादून में ज्यादातर छोटे-बड़े अस्पताल पूरी तरह बंद रहे।

क्लीनिक या कैंप में ओपीडी करने वाले ज्यादातर डॉक्टरों ने भी मरीज नहीं देखे। इसके चलते बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे मरीजों को मायूस लौटना पड़ा। तालाबंदी की जानकारी मिलने के बाद मरीजों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया। विशेष तौर पर पहले से उपचार करवा रहे मरीजों को अस्पताल बंद होने के चलते दिक्कत झेलनी पड़ी। 
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चकराता रोड स्थित आईएमए कार्यालय में प्रदेश सचिव डा. डीडी चौधरी ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और स्वास्थ्य सचिव से वार्ता के दौरान एक्ट में संशोधन पर सहमति बनी थी।

अब सरकार समझौते के बावजूद एक्ट में उनके सुझावों और संशोधनों को शामिल नहीं कर रही है। इससे आईएमए सदस्यों में रोष है। इसके चलते उन्हें तालाबंदी करने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि 17 फरवरी को काशीपुर में संघ की बैठक आयोजित होगी। इसमें तालाबंदी को लेकर फैसला लिया जाएगा। 

सरकार वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत हमें छूट नहीं दे रही है। आए दिन हमारे भवन प्रावधानों को लेकर शासन-प्रशासन की ओर से चेतावनी दी जा रही है। हमारे भवनों को अवैध बताया जा रहा है। जब हमारे भवन अवैध हैं तो हम खुद ही उन पर तालाबंदी कर रहे हैं। 
-डा. संजय गोयल, अध्यक्ष, आईएमए दून
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