भारत दौरे के दौरान प्रिंस चार्ल्स अपनी कंपनी हाई स्टेट ग्रोव को स्थापित करने की संभावना को तलाश करने में जुटे रहे।
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इसी का नतीजा रहा कि भारत दौरे के दौरान चार्ल्स ने उत्तराखंड की ओर रुख किया, जहां जैविक खेती से लेकर पर्यावरण संरक्षण के बारे में सीखने के लिए काफी कुछ है।
चार्ल्स की कंपनी
प्रिंस चार्ल्स की कंपनी जैविक खेती पर काम करती है। वर्ष 1990 में यह कंपनी शुरू हुई थी, जिसका धीरे-धीरे विस्तार हुआ। वर्ष 2008 की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी कंपनी 200 खाद्य वस्तुओं से लेकर बागान के फर्नीचर बनाकर बेचने का काम करने लगी। कंपनी का सबसे अधिक फोकस जैविक खेती पर है।
क्यों हुआ उत्तराखंड का दौरा
उत्तराखंड में जैविक खेती पर काम करने वाली दो महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। एक नवधान्या और दूसरा वन अनुसंधान संस्थान। इन दोनों संस्थाओं में चार्ल्स ने लगभग तीन घंटे से अधिक समय व्यतीत किया। नवधान्या में चार्ल्स ने भारत की परंपरागत खेती पद्धति से भी रूबरू हुए।
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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में वैज्ञानिक पहलू के बारे में जानकारी प्राप्त की। उत्तराखंड में जैविक खेती के अलावा जड़ी-बूटी के बारे में भी अपार संभावनाएं है। इस नजरिए से देखा जाए तो चार्ल्स की कंपनी के लिए उत्तराखंड काफी उपजाऊ साबित हो सकता है। यहां से चार्ल्स कारोबार न भी करें तब भी वह उसके लिए काफी कुछ सीख सकते हैं।
उद्योगपतियों से मिलना
दौरे के दौरान देश और राज्य के कई उद्योगपतियों से मिलने का भी बहुत कुछ मतलब निकाला जा रहा है। कहा जा रहा है कि चार्ल्स उद्योगपतियों की मदद से उत्तराखंड और देश के दूसरे हिस्सों में अपनी कंपनी का विस्तार करने की तैयारी में हैं।
भारत जैविक खेती के लिए बड़ा बाजार साबित हो सकता है। हालांकि ऑन द रिकॉर्ड इस सच को स्वीकार करने को नेता से लेकर व्यापारी तक तैयार नहीं हैं। नौकरशाही से लेकर राजनेता तक प्रिंस चार्ल्स के दौरे के निहितार्थ को समझने में ही लगे हैं।
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