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उत्तराखंड में बंद होंगे प्राइमरी और जूनियर स्कूल, जानिए कारण

Wed, 12 Jul 2017 03:28 PM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
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सरकारी स्कूल के बच्चे
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आने वाले कुछ सालों में सभी प्राइमरी, अपर प्राइमरी, जूनियर हाईस्कूल और हाईस्कूल बंद हो जाएंगे। इनकी जगह 10 से 12 स्कूलों के बीच एक इंटरमीडिएट कॉलेज खोला जाएगा।
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बंद होने वाले सभी स्कूलों के बच्चे और शिक्षक इस इंटर कॉलेज में समायोजित होंगे। सभी कैडर के शिक्षकों को इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रधानाचार्य के नेतृत्व में काम करना होगा। उत्तराखंड में शासन स्तर पर इस मॉडल पर काम करने के लिए प्लानिंग की जा रही है।

सरकारी शिक्षा की दशा सुधारने के लिए अधिकारी अलग-अलग राज्यों के एजूकेशन मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी एजूकेशन सिस्टम का मॉडल अलग-अलग है। अभी तक अधिकारियों को जो मॉडल सबसे ज्यादा पसंद आया, वह राजस्थान का है। ज्यादातर अधिकारी इस मॉडल पर अपनी सहमति भी जता चुके हैं।  
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यह रहेगा मॉडल 

- फोटो : file photo
प्रदेश में अभी तक छोटे-छोटे गांवों और मोहल्लों में प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूल हैं। जबकि दो चार गांवों के बीच जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल और आठ से 10 गांवों के बीच इंटरमीडिएट कॉलेज हैं। इनमें से ज्यादातर स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों अनुपात गड़बड़ाया हुआ है।

कहीं शिक्षक नहीं है तो कहीं छात्र। ऐसे में छोटे स्कूलों को बंद कर सेंटर में इंटरमीडिएट कॉलेज खोलने की योजना है। सभी शिक्षक और छात्र यही समायोजित होंगे। इससे कॉलेज में पर्याप्त संख्या में छात्र और शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे। इन कॉलेजों में कक्षा एक से 12वीं तक की पढ़ाई होगी।

राजस्थान मॉडल का एजूकेशन सिस्टम प्रदेश के लिए मुफीद साबित हो सकता है। हम मॉडल का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। अगर यह सिस्टम लागू हुआ तो शिक्षकों और छात्रों की संख्या व अनुपात के मामले में सुधार होगा।
- कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
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