महंगाई के नाम से ही डर रहे आम आदमी के लिए बिचौलिये एक बड़ी मुसीबत बन गए हैं।
बिचौलियों की वजह से बढ़ी महंगाई
देहरादून की मंडी में महंगाई उन्हीं की वजह से पैदा हो रही है। यह ‘मिडिलमैन’ हैं, जो थोक विक्रेता से सब्जी-फल खरीद फुटकर विक्रेताओं को बेचते हैं। इनकी लागत भी फुटकर विक्रेता ग्राहक की जेब से निकालने पर उतारू हैं।
यही वजह है कि मंडी से निकलते ही वह मनमाने रेट वसूल रहे हैं। उनके रेट अक्सर रिहायश के हिसाब से तय होते हैं। पॉश इलाके में प्रवेश करते ही रेट में पांच से लेकर आठ रुपए तक का उछाल मामूली बात है।
फुटकर विक्रेताओं की इसी वसूली पर रोक लगाने के लिए मंडी समिति पदाधिकारियों ने गुरुवार को फुटकर विक्रेता एसोसिएशन संग बैठक की। मनमानी न रुकने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
फुटकर विक्रेताओं ने रखी अपनी समस्याएं
शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे तक चली इस बैठक में फुटकर विक्रेताओं ने अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना था कि फुटकर विक्रेताओं को शहर में प्रशासन और निगम की तरफ से स्थान आवंटित नहीं।
इस कारण उन्हें दुकान लगाने का किराया अधिक देना पड़ता है। इसके अलावा मंडी से फुटकर मार्केट तक का भाड़ा भी काफी बैठता है।
दुकान किराये, भाड़े की लागत और मजदूरी जोड़कर ही वे फल सब्जियों का दाम तय करते हैं। ऐसे में अच्छी बिक्री न हो तो नुकसान उठाना पड़ता है।
बता दें कि ठेली वालों की संख्या यहां 10 से लेकर 12 हजार के बीच है। यह भी तय हुआ कि फुटकर विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी तरह की वसूली पर ग्राहक सीधे उनसे संपर्क साध सकें।
इस दौरान मंडी समिति के टीएन चौबे, मंडी निरीक्षक अजय डबराल, फुटकर विक्रेता सईद अहमद, महबूब आलम, मोहम्मद ताहिर, नजाकत खान, शकील, नईम, सुरेश, नवीन, सुनील आदि उपस्थित रहे।
आलू में चार, प्याज में दो रुपए का आया उछाल
मंडी में गुरुवार को आलू के रेट में चार, जबकि प्याज के रेट में दो रुपए प्रति किलो की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। आलू का भाव बीते बुधवार मंडी में छह रुपये से 12 रुपए के बीच बना हुआ था, जो गुरुवार को 10-16 रुपए के बीच रहा।
उधर, प्याज के भाव बीते बुधवार 8-12 रुपए प्रति किलो थे, जो गुरुवार को 10-14 रुपए प्रति किलो दर्ज किए गए।
मंडी में इस वक्त ग्रेडेड नहीं, लाल प्याज
दून की मंडी में इस वक्त लाल प्याज की भरमार है। वजह यह है कि इस समय प्याज की आवक नासिक से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों से हो रही है।
तकरीबन एक माह से इन्हीं राज्यों के इलाकों से मंडी में आवक बनी हुई है। इसकी एक वजह यह है कि यह प्याज नासिक के प्याज से सस्ता पड़ता है।
नासिक का प्याज ग्रेडेड होता है, जिसकी वजह से उसकी कीमत ज्यादा होती है। कीमतों में अंतर की बात करें तो मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्याज की कीमत नासिक के प्याज के मुकाबले तीन-चार रुपए कम पड़ती है।