मामले में संज्ञान लेते हुए पीसीआई चेयरमैन चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट देने के लिए कहा है। पीसीआई की ओर से जारी बयान के मुताबिक उत्तराखंड सरकार का फैसला प्रेस की आजादी का हनन करता है।
उत्तराखंड सरकार ने सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में ‘बाहरी लोगों’ के प्रवेश को प्रतिबंधित करते हुए कहा था कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि कई बार कैबिनेट बैठकों का एजेंडा पहले ही मीडिया को लीक हो जाता था।
इस फैसले की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा था कि पत्रकारों को सरकार के फैसलों की जानकारी हर शाम प्रेस वार्ता कर दी जाएगी। यह अलग बात है कि आदेश जारी होने के बाद से एक बार भी शाम को प्रेस वार्ता नहीं हुई। उधर मीडिया से जुड़े लोगों ने सरकार के इस कदम को पारदर्शिता खत्म करने कोशिश करार दिया था।