आखिरकार ईपीएफओ की ओर से कंपनी के निदेशक प्रीतपाल सिंह चावला को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद निदेशक ने जुर्माने की रकम का ड्राफ्ट जमा कराया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई निरस्त की गई। ईपीएफओ की ओर से किसी कंपनी के खिलाफ पीएफ अंशदान में लापरवाही या गड़बड़ी करने पर यह लगातार दूसरी कार्रवाई है। मामले में डेफो हिल्स लैबोरेट्रीज कंपनी के निदेशक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन नहीं मिला। जब उनका पक्ष आएगा तो वह भी प्रकाशित किया जाएगा।
ईपीएफओ के पास आयकर जैसी पावर
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पास भी आयकर विभाग जैसी शक्तियां हैं। यहां पीएफ चोरी के मामले में आयकर अधिनियम के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाती है। ईपीएफओ के असिस्टेंट कमिश्नर आशीष कुमार के मुताबिक आईटी एक्ट के तहत ईपीएफओ किसी कंपनी में न केवल चल-अचल संपत्ति को नीलाम कर सकता है बल्कि कंपनी में रिसीवर भी तैनात कर सकता है। इसके अलावा कंपनी के परिसर को सील भी किया जा सकता है। ईपीएफओ के फैसले को सीधे हाईकोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है।
ईपीएफओ तकनीकी तौर पर सुदृढ़ होने के चलते सभी कंपनियों को ट्रेस कर रही है। जो कर्मचारियों का पीएफ अंशदान नहीं देगा, गड़बड़ी करेगा, उन पर कार्रवाई तय है। जल्द ही और कंपनियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
- मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1, देहरादून