सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों देहरादून को अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रूड ऑयल रिसर्च लैब का तोहफा मिला।
आईआईपी में स्थापित क्रूड ऑयल रिसर्च लैब में ईंधन में हैवी एंड डीजल, गैसोलिन, सल्फर की मात्रा का पता लगाकर ईंधन की मार्केट वैल्यू आंकी जा सकेगी।
भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) में लैब का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों को नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल की सलाह दी। वर्तमान दौर को ज्ञान क्रांति का युग बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा जरूरी है।
लैब के उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि रुपये की गिरावट बढ़ रही है और देश को 190 मिलियन टन कच्चा तेल आयात करना पड़ रहा है। इसे जनता को उसके खरीद योग्य दामों पर उपलब्ध कराना होता है। देश की सकल आय प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत से जुड़ी होती है। ऐसे में ऊर्जा संसाधनों के विकास पर ध्यान देना जरूरी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक निजी तकनीकी विकास के साथ वैश्विक स्तर पर नॉलेज नेटवर्किंग में भी दिलचस्पी लें और ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि इस बात की खुशी है कि आईआईपी संस्थान ने बहुत से नये ईको फ्रेंडली प्रयोग किये हैं। केंद्रीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की पहल से आपदा प्रभावित उत्तराखंड में पेयजल, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ, बिना चमडे़ के फुटवियर, अस्थाई आश्रय और अन्य बुनियादी सेवाएं दी जा सकती हैं। उन्होंने आपदा में मृत लोगों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना भी व्यक्त की।
मुखर्जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सहयोग से डॉ. शांति स्वरूप भटनागर ने सीएसआईआर की स्थापना की थी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में शोध के लिए 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं। मुझे खुशी है सीएसआईआर की ऐसी ही एक प्रयोगशाला की स्थापना देहरादून में हुई है।
इस मौके पर राष्ट्रपति ने संस्थान परिसर में रूद्राक्ष का पौधारोपण किया। राज्यपाल डा.अजीज कुरैशी ने राष्ट्रपति को भारत के आर्थिक विकास का नायक बताया। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि उत्तराखंड में आई आपदा में राहत कार्यों के लिए राष्ट्रपति का आशीर्वाद हमें मिला है। निदेशक सीएसआईआर आईआईपी डा. एमओ गर्ग ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।
लैब की खासियत
आईआईपी में स्थापित क्रूड ऑयल रिसर्च लैब में ईंधन में हैवी एंड डीजल, गैसोलिन, सल्फर की मात्रा का पता लगाकर ईंधन की मार्केट वैल्यू आंकी जा सकेगी।
इसके माध्यम से विदेशी मुद्रा का अर्जन भी संभव होगा। आईआईपी के तकनीकी निदेशालय प्रमुख डा. एसके शर्मा के अनुसार इस लैब में वैज्ञानिकों के रिसर्च वर्क के साथ ही यहां से पीएचडी करने वालों को भी सहूलियत होगी।
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