राष्ट्रपति ने कहा कि पतित पावनी मां गंगा के उत्पत्ति स्थल गंगोत्री में भी वह गंगा के नाम से जानी जाती हैं। गंगा जहां बहुत बड़े सागर में विसर्जित होती है, वहां भी वह गंगा ही है। गंगा ने अपना चरित्र नहीं छोड़ा। यही मां गंगा की सार्थकता है।
अध्यात्म ही भारत का आधार, सभी को मिली है शांति
राष्ट्रपति ने कहा कि वह विदेश यात्रा पर जाते रहते हैं। एक संस्मरण को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार स्विट्जरलैंड की राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि हमारे देश में धन और समृद्धि दोनों है। फिर भी हम भौतिकता की ओर भागते हैं। हमारे यहां शांति नहीं है। भारत में ऐसा क्या है, जो लोग अध्यात्म को प्राथमिकता देते हैैं। ऐसा क्या कि भारत में शांति है और हमारे यहां अशांति है। राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने उनको जवाब दिया कि अध्यात्म ही भारत का आधार है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि विश्व के समृद्ध देश भारत के प्रति यह सोच रखते हैं। परमार्थ निकेतन की साध्वी भगवती सरस्वती अध्यात्म की खोज में ही अपना देश छोड़कर भारत आ गईं। विदेश से कई लोग आध्यात्मिक अनुभूति के लिए भारत का रुख करते हैं। वहीं विदेश यात्रा पर जाने वाले देश के लोगों को केवल वहां की सुंदरता ही आकर्षित करती है।