देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की गई। बैठक में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपीएटी की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) और आगामी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत 23 अक्तूबर से राज्य के सभी 13 जिलों में ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच शुरू होगी। यह कार्य इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकृत इंजीनियरों की ओर से वेयरहाउस में प्रतिदिन सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय और केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकृत प्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया का साक्षी बनने के लिए अवश्य तैनात करें।
इसके साथ ही राज्य में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा भी की गई। एक जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी नए युवा मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए पात्र होंगे। आगामी 12 नवंबर को एकीकृत ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी, जिनका निस्तारण 28 दिसंबर तक होगा। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन चार जनवरी 2027 को किया जाएगा।
आयोग को मिले एक लाख नए वोट के आवेदन
आयोग के अनुसार, हाल ही में 12 से 20 अक्तूबर के बीच चलाए गए विशेष अभियान में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए 1,00,744 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए हैं। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि दावों-आपत्तियों के दौरान कोई भी आक्षेपकर्ता अधिकतम दस फॉर्म-7 और सतत अद्यतन के दौरान प्रति माह अधिकतम पांच फॉर्म-7 आवेदन ही दे सकता है।