खनन के जरिए राजस्व में वृद्धि की जा सके
कहा, कई नदी क्षेत्र ऐसे हैं, जहां वर्षों से खनन नहीं होने के कारण नदियों का तल लगातार ऊपर उठ रहा है। इससे बाढ़ और तमाम दूसरी व्यावहारिक परेशानियां भी सामने आ रही हैं, इसलिए प्रदेश में नए खनन क्षेत्र चिह्नित किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि खनन के जरिए राजस्व में वृद्धि की जा सके।
इधर, 10 दिन बाद यानि एक अक्तूबर से प्रदेश में खनन कार्य शुरू हो जाएगा और वन विकास निगम को कुमाऊं की पांच नदियों गौला, कोसी, शारदा, दाबाका और नंधौर के लिए अभी तक वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। यह स्वीकृति अगले पांच साल यानि एक अक्तूबर 2023 से जून 2028 तक ली जानी है।
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वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक एसएस सुबुद्धि ने बताया, खनन के लिए केंद्र सरकार की ओर से वन स्वीकृति पहले मिल चुकी है। बताया, पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संभवत: एक-दो दिन में यह भी मिल जाएगी।