अतिरिक्त बिजली का प्रबंधन करना होगा
निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और संबंधित कंपनियों के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) साइन करने से पहले यूपीसीएल को उत्तराखंड सरकार से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। आयोग ने नोट किया कि इस खरीद के बाद मानसून के तीन महीनों (जुलाई से सितंबर) में राज्य के पास जरूरत से ज्यादा बिजली (सरप्लस) होगी। यूपीसीएल को इस अतिरिक्त बिजली को बैंकिंग या व्यापार के माध्यम से सर्दियों के महीनों (दिसंबर से मार्च) में इस्तेमाल करने की पुख्ता योजना बनानी होगी। वहीं, जटिल होते बिजली ग्रिड और सौर व पंप स्टोरेज प्लांट जैसी तकनीकों के बेहतर तालमेल के लिए आयोग ने यूपीसीएल को एक स्वतंत्र और तकनीकी विशेषज्ञों से लैस पावर मैनेजमेंट ग्रुप बनाने की सलाह भी दी है।
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2040 तक 3540 करोड़ यूनिट बिजली की मांग
यूपीसीएल ने अपनी याचिका में जो तथ्य दिए थे, उस हिसाब से अगले 10 वर्षों में बिजली की मांग का अनुमान भी शामिल है। इसके तहत वर्ष 2030-31 में 2329.4 करोड़ यूनिट, 2031-32 में 2453.6 करोड़ यूनिट, 2032-33 में 2582.0 करोड़ यूनिट, 2033-34 में 2697.5 करोड़ यूनिट, 2034-35 में 2831.2 करोड़ यूनिट, 2035-36 में 2967.5 करोड़ यूनिट, 2036-37 में 3109.2 करोड़ यूनिट, 2037-38 में 3255.7 करोड़ यूनिट, 2038-39 में 3394.9 करोड़ यूनिट और 2039-40 में 3540.1 करोड़ यूनिट बिजली की मांग संभावित है। आयोग ने मांगा है कि वर्ष 2030-31 में बिजली की कमी 968 मेगावाट से बढ़कर 2038-39 में 2044 मेगावाट तक पहुंच सकती है।