चुनावी समीकरण बदलने का दम रखने वाले पोस्टल बैलेट इस बार बड़ी कम संख्या में पहुंचे। उत्तराखंड में भाजपा को पांचों सीटों पर भारी मतों से मिली जीत में सैन्य मतों की हिस्सेदारी ना के बराबर रही।
राज्य में सेना, अर्द्धसेना बलों सहित अन्य के 97 हजार पोस्टल बैलेट हैं, जिसमें से महज 16 हजार ही निर्वाचन आयोग के पास पहुंचे। गलत डाक पता होने के कारण अधिकांश बैलेट बैरंग ही लौट आए।
सभी ने खेलें दांव
पोस्टल बैलेट के महत्व को देखते हुए कांग्रेस और भाजपा ने चुनाव के दौरान कई दांव खेले। कांग्रेस जनरल टीपीएस रावत और जनरल गंभीर सिंह नेगी को लेकर आई तो भाजपा जनरल बीसी खंडूड़ी के साथ लगभग कई जनरलों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही।
पौड़ी, टिहरी संसदीय सीट पर लगभग 70 हजार मत पोस्टल बैलेट हैं, जिसमें से अधिकांश बैरंग ही लौट आए। बैरंग लौटे पोस्टल बैलेट का बड़ा कारण गलत डाक पता रहा।
अर्धसैन्य बलों के सबसे कम बैलेट
अर्द्धसैन्य बलों के पोस्टल बैलेट की संख्या सबसे कम रही। इससे पहले लोकसभा चुनावों में चालीस फीसदी तक पोस्टल बैलेट पहुंचे हैं। पौड़ी संसदीय सीट पर पोस्टल बैलेट की 45 हजार की संख्या निर्णायक साबित होते रहे हैं, लेकिन इस बार वहां मात्र 5055 मत ही सैनिकों के पहुंचे हैं।
2009 के लोकसभा चुनावों में कुल 29 हजार सर्विस वोटर्स से 10 हजार पहुंचे थे। अल्मोड़ा में 25 हजार से अधिक पोस्टल बैलेट हैं, लेकिन 928 ही पहुंच पाए।
भाजपा को अधिक मिलते हैं सैन्य मत
पोस्टल बैलेट के माध्यम से सैनिकों के मत कांग्रेस के मुकाबले भाजपा के खाते में अधिक मिलते हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा बेशक पांचों सीट हार गई, लेकिन पोस्टल बैलेट में भाजपा ने कांग्रेस से अधिक मत हासिल किये।
इससे पहले पौड़ी-गढ़वाल के संसदीय उपचुनाव 2008 के अलावा टिहरी उपचुनाव 2012 में भी पोस्टल वोट में भाजपा ने बाजी मारी।
सीट ----- पोस्टल बैलेट - पहुंचे
टिहरी ---- 43700 ------ 5055
अल्मोड़ा -- 25423 ------ 928
टिहरी ---- 12028 ------- 5864
नैनीताल -- 9980 -------- 2460
हरिद्वार --- 5854 -------- 2627