आयोग ने सिफारिश की कि जहां उपयोगिता नहीं रह गई है, वहां चरणबद्ध ढंग से सब्सिडी समाप्त की जानी चाहिए। सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार किया है। रिपोर्ट में राज्य सरकारी की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली सहकारी चीनी मिलों के निजीकरण, उन्हें पीपीपी मोड पर चलाने व इथेनॉल प्लांट बदलने की सिफारिश का उल्लेख है। आयोग का मानना है कि बिजली क्षेत्र में सब्सिडी को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाए।
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11 प्रतिशत हस्तांतरण की सिफारिश, 10.50 प्रतिशत मंजूर
राज्य वित्त आयोग ने कोविड महामारी के कार बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए अपने राजस्व (जीएसटी मुआवजे सहित) के 11 प्रतिशत हस्तांतरण की सिफारिश की। इसे शहरी स्थानीय निकाय और ग्रामीण निकायों के बीच 60 व 40 के अनुपात में विभाजित किया गया। सरकार ने 10.50 प्रतिशत धनराशि ही रखे जाने को ही मंजूरी दी।
किस निकाय के लिए कितना अंश
राज्य वित्त आयोग की सिफारिश पर किस शहरी और ग्रामीण निकाय को कितना प्रतिशत अंश मिलेगा, यह भी निर्धारित किया गया है। शहरी स्थानीय निकायों में नगर निगमों के लिए 40 प्रतिशत, नगर पालिका के लिए 47 प्रतिशत और नगर पंचायतों के लिए 13 प्रतिशत की सिफारिश की गई है। ग्रामीण निकायों में जिला पंचायतों के 37.5 प्रतिशत क्षेत्र पंचायतों के लिए 17.5 प्रतिशत और ग्राम पंचायतों के लिए 45 प्रतिशत अंश तय हुआ है।
नए निकायों के लिए अनुदान
आयोग के अधिनिर्णय की अवधि में नव सृजित नगर पालिका व नगर पंचायतों को 1.25 करोड़ रुपये और शेष वर्षों के लिए एक करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। आयोग ने शेष वर्षों के लिए 75 लाख रुपये की सिफारिश की, जिसे सरकार ने बढ़ाया। नई, स्टाफ कार व जीप अनुदान से नहीं खरीदी जाएंगी।
बदरी, केदार और गंगोत्री निकायों को दो करोड़
आयोग की सिफारिश में संशोधन करते हुए सरकार ने बदरीनाथ नगर पालिका को एक करोड़ के स्थान पर दो करोड़ और केदारनाथ व गंगोत्री निकाय के लिए पचास लाख की जगह दो करोड़ देने को स्वीकृति दी।
शैक्षिक संस्थानों में खर्च की जांच होगी
आयोग का मानना है कि स्कूलों, कॉलेजों, औद्योगिक प्रशिक्षण व पॉलिटेक्निक व अन्य शैक्षिक संस्थानों में बड़े खर्च की जांच की जानी चाहिए। जिन संस्थानों में बुनियादी ढांचा न करे बराबर हैं, छात्र शिक्षक अनुपात कम है, उन्हें बंद करना चाहिए। पड़ोसी क्षेत्र के संस्थानों में इन्हें मिला देना चाहिए। आयोग की इस सिफारिश को भी सरकार ने मान लिया है।
कर्मचारियों के वेतन भत्ते और पेंशन का खर्च कम करने के लिए विभागों का पुनर्गठन।
नगरपालिका क्षेत्र में बिजली की खपत पर एक अधिबार या उपकर लगे, इससे बिजली बिलों का भुगतान हो।
विस्तृत सर्वेक्षण के बाद जीआईसी आधारित मास्टर प्लान तैयार हो, इसके लिए 15 करोड़ अनुदान दिया जाए।
400 करोड़ की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना में राज्य के हिस्से की 180 करोड़ के अनुदान की सिफारिश।
भूमिगत कचरा बिन स्थापित करने के लिए 20 करोड़ रुपये की सिफारिश की।
शहरी निकायों में देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में विद्युत शवदाह गृह बनें, 100 करोड़ के संयुक्त अनुदान की सिफारिश।
प्रदेश के ग्रामीण निकायों में 20 करोड़ रुपये का संयुक्त अनुदान दिया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाना होगा। स्वैच्छिक, समेकित, प्रसंस्करण उद्योग लिंकेज के साथ अनुबंध खेती व तकनीकी निवेश की समीक्षा होनी चाहिए।
कृषि, बागवानी अनुसंसाधन, प्रसंस्करण, उत्पादन, विपणन में यदि गंभीर अड़चने हैं, तो संस्थागत संरचना और रणनीति में बदलाव किए जाएं।
बैंकाक की तर्ज पर जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान आवश्यक है।
पर्यटन विकास योजना पर नए सिरे से विचार कर भविष्य की योजनाओं और रणनीतियों को बदली हुईं परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना होगा।
शहरी स्थानीय निकायों के लिए वैल्यू कैप्चर फाइनेंस को राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बनाया जा सकता है। विकास प्राधिकरण बेहतरी शुल्क, विकास शुल्क लागू कर सकते हैं।
आयोग ने पूर्ववर्तीय आयोग की तर्ज पर जिला पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को संपत्ति एवं विभव कर को व्यवसाय कर के रूप में लगाने की सिफारिश की है।
ग्राम पंचायतों के कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी को दूर किया जाना चाहिए।
शहरी स्थानीय निकायों के भीतर एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन या प्रकोष्ठ बनें, जिसमें विशिष्ट तकनीकी और प्रबंधकीय विशेषज्ञता वाले कर्मचारी हों।
शहरीकरण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार करने और स्थानीय परिस्थितियों व विभिन्न हितधारकों के लिए उपयुक्त व उचित समाधान के उपाय सुझाने के लिए शहरी विकास संस्थान की स्थापना होनी चाहिए।
शहरी विकास निदेशालय को भी मजबूत किया जाना चाहिए।