केदारखंड में आपदा आई तो हाकिम को याद आया कि एक कंट्रोल रूम भी है। आनन फानन में सुग्गू तोते की कंट्रोल रूम में तैनाती हो गई। पर मानसून का महीना। झमाझम बरसात।
बैरी मन था कि एक जगह टिकता ही नहीं था। कभी कुल्लू मनाली की सैर पर निकल जाता था तो कभी हाकिम के दरबार में पहुंचकर पोस्टिंग-पोस्टिंग चिल्लाता। कंट्रोल रूम में धड़ाधड खबरें आ रही थीं।
हिंदी फिल्मों के विलेन की तरह आपदा एक के बाद एक नए-नए सितम ढा रही थी। सुग्गू तोते का मन बैचेन हो गया। आपदा प्रबंधन का पाठ पढ़ा हुआ था। इसलिए घबराया नहीं। एक लिस्ट बनाई। हाकिम तक पहुंच रखने वालों की।
इस लिस्ट में आपदा पीडि़त खोजे और कंट्रोल रूम से फरमान जारी हुआ कि पहले इन आपदा प्रभावितों को मदद पहुंचाई जाए। कंट्रोल रूम का फरमान भला कौन टालता।
मदद मिली तो लोगों ने पहुंच-संपर्क का लाभ लेकर हाकिम को बताया कि राहत मिल गई। हाकिम भी खुश की काम हो रहा है। सुग्गू तोता भी खुश। पोस्टिंग तो कहीं नहीं गई। पर इसमें बिन बुलाए एक अड़चन आ ही गई।
हाकिम के सिपहसालारों की लिस्ट भी अब सुग्गू तोते को बनानी पड़ रही है। एक लिस्ट बनती है तो दूसरी पर काम शुरू हो जाता है।