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उत्तराखंड के 'भविष्य' के साथ खेल कर रही सरकार

Fri, 06 Feb 2015 01:28 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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वर्ष 2014 में 20 नए महाविद्यालय खोलकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाली सरकार की उच्च शिक्षा के प्रति बेरुखी और असफलता की एक बात और सामने आई है।
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प्रदेश में चल रहे 90 राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों को आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार नई भर्ती करने को तैयार नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट की ओर से मांगी गई सूचना में यह बात सामने आई है।

90 सरकारी महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं के कुल 1656 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 971 पद खाली हैं। हालांकि, 408 संविदा शिक्षकों को नियुक्त किया गया है, लेकिन हालात बताते हैं कि यह व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही। वहीं 563 पद ऐसे हैं जिन पर संविदा शिक्षक भी नहीं हैं।
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इसके अलावा प्रदेश में 20 प्रवक्ता ऐसे भी सामने आए हैं, जो महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य नहीं कर रहे हैं। इनमें से दो तो प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। बाकी लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इन पदों को भी जोड़ें को कुल 583 पदों पर कोई भी शिक्षक नहीं है।
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सबसे ज्यादा कमी अंग्रेजी में

रिक्त 971 पदों में सबसे ज्यादा 95 अंग्रेजी विषय के हैं। शारीरिक विज्ञान, टूरिज्म, दर्शनशास्त्र तथा पत्रकारिता विषय का कोई पद रिक्त नहीं है।

इसके अलावा हिंदी के 85, संस्कृत के 44, भूगोल के 45, अर्थशास्त्र के 74, राजनीतिक शास्त्र के 81, समाजशास्त्र के 61, इतिहास के 52, शिक्षा शास्त्र के 18, मनोविज्ञान के सात, शारीरिक शिक्षा के छह, गृह विज्ञान के 15, सैन्य विज्ञान के नौ, बीएड के 15, संगीत के पांच, सांख्यिकी के तीन, भूगर्भ विज्ञान के आठ, विधि पांच, चित्रकला के तीन, बेसिक हयूमेनेटिज एक, मानव विज्ञान दो, बेसिक साइंस एक, भौतिक विज्ञान 53, रसायन विज्ञान 58, जंतु विज्ञान 50, वनस्पति विज्ञान 51, गणित 44, वाणिज्य 62, बीबीए तीन, बीसीए छह, एमबीए पांच, बीटीएस एक, कंप्यूटर विज्ञान के तीन पद रिक्त हैं।

गढ़वाल मंडल में ज्यादा परेशानी
गढ़वाल मंडल के कुल 48 सरकारी महाविद्यालयों में कुल 835 स्वीकृत पदों में से 524 रिक्त हैं। इनमें से 210 पदों पर संविदा शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि संविदा शिक्षकों के पदों को छोड़कर भी 314 पदों पर कोई शिक्षक कार्यरत नहीं है।

इसी प्रकार, कुमाऊं मंडल के कुल 42 सरकारी महाविद्यालयों में कुल 821 पदों में से 354 पदों पर ही नियमित प्रवक्ता कार्यरत है। शेष 467 पद रिक्त है। इनमें से केवल 198 पदों पर संविदा शिक्षक कार्य कर रहे हैं। जबकि संविदा शिक्षकों के पदों को छोड़कर भी 269 पद रिक्त हैं, जिस पर कोई शिक्षक कार्य नहीं कर रहा है।

केवल 273 का ही भेजा अधियाचन
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना से यह भी स्पष्ट है कि इन रिक्त पदों के जल्दी भरने की भी कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि पूरी तरह रिक्त 563 पदों में से अधियाचन केवल 273 पदों का भेजा गया है। लोक सेवा आयोग के जरिये इन पदों पर नियुक्ति हो भी जाती है तो 290 पद फिर भी रिक्त रह जाएंगे।
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