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PM मोदी की मनाही के बाद भी BJP में चल पड़ी विरासत की सियासत

Thu, 19 Jan 2017 01:11 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : file photo
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एनडी तिवारी का कांग्रेस से छह दशकों का नाता तोड़ने की वजह तो उनका बेटा रोहित ही है, लेकिन टीम शाह के भाजपा में परिवारवाद की नई रवायत शुरू करने की वजह साफ नहीं है।
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कांग्रेसियों को अपनों पर दी जा रही तरजीह से पार्टी ‘मोदी कांग्रेस’ के जुमले को सार्थक करती दिख रही है। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी बेटे के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर पहुंचे तो भाजपा के विरासत की सियासत की ओर कदम बढ़ाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया। हालांकि तिवारी ने पार्टी ज्वाइन करने के बजाय चुनाव में समर्थन देने की बात कही है।

इन सबके बीच भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में एक सवाल बार-बार कौंध रहा है कि आखिर टीम शाह को बाहरियों पर इतना विश्वास क्यों है? कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को ‘अपनों’ पर भरोसा नहीं है। 16 जनवरी को टिकटों के आवंटन से उठे बगावत के सुर बरकरार हैं, इस बीच पार्टी ने अपने पाले में उत्तराखंड के पांचवें पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में एनडी तिवारी को शामिल कर लिया।
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कांग्रेस में सेंधमारी का सिलसिला लगातार जारी

अमित शाह (फाइल फोटो)
भाजपा में 18 मार्च 2016 को शुरू हुआ कांग्रेस में सेंधमारी का सिलसिला लगातार जारी है। कांग्रेस मुक्त भारत की थ्योरी पर काम कर रही राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की टीम उत्तराखंड में हर दांव खेल रही है, जिससे पब्लिक में यह संदेश जाए कि कांग्रेस नेता पार्टी से नाराज होकर भाजपा को मान रहे बेहतर सियासी विकल्प। बीते दस माह में यह संदेश देने में भाजपा कितनी कामयाब रही है, इसका जवाब तो चुनाव नतीजे आने के बाद भी पता चलेगा।

पच नहीं रहा एनडी व रोहित का आना
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ आए नौ विधायकों से कांग्रेस को खासा नुकसान पहुंचा चुकी भाजपा ने तोड़-फोड़ के क्रम को जारी रखा है। यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव के एंट्री करते ही दो दो टिकट ले जाने से स्तब्ध पार्टी कैडर के लिए एनडी और उनके बेटे रोहित का आना पच नहीं रहा है।

पार्टी में अब तक जिन 18 बाहरियों को शामिल किया है, उसमें एनडी सबसे बड़ी सियासी हस्ती हैं। रोहित को कहां से भाजपा टिकट देगी, यह फिलहाल साफ नहीं है। लेकिन अगर उनको टिकट मिलता है तो विरोध की चिंगारी एक और सीट में भड़कना तय है।
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डबल स्टेंडर्ड से पुराने भाजपाई परेशान

विजय बहुगुणा - फोटो : AmarUjala
भाजपा में बाहरियों खासकर कांग्रेस चेहरों के आने से बढ़ता असंतोष सिर्फ उनके आने से नहीं है बल्कि पार्टी के दोहरे मानकों से है।

अपनी पार्टी में अगर पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी को छोड़ दिया जाए तो किसी और की पुत्र पुत्री को आगे नहीं बढ़ाया। जबकि बाहरियों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे को सितारगंज, यशपाल और उनके बेटे को भी टिकट दिया गया। इतना ही नहीं मौजूदा विधायकों और मजबूत दावेदारों को किनारे करके सभी बाहरियों को टिकट दे दिया गया।

प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी बाहरियों को लेकर उनकी पूछ नहीं होने और पुराने नेताओं के टिकट कटने से नाराज हैं। 24 ऐसी विधानसभाएं हैं जहां विरोधी सुर दिल्ली तक सुनाई देने लगे हैं।
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