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बीते कई चुनावी साल, पूरी नहीं हुई पृथक जिले की मांग

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विश्वभर में योगनगरी के नाम से प्रसिद्ध ऋषिकेश से चार जिलों की सीमाएं लगती हैं। इसमें देहरादून जिले का ऋषिकेश, टिहरी गढ़वाल का मुनिकीरेती क्षेत्र, पौड़ी गढ़वाल का स्वर्गाश्रम क्षेत्र और हरिद्वार से सटा हरिपुरकलां क्षेत्र शामिल है। मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 100-150 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय से डोईवाला, नरेंद्रनगर, यमकेश्वर और टिहरी गढ़वाल की भरपूर पट्टी को मिलाकर ऋषिकेश जिले के गठन की मांग उठ रही है, लेकिन इसे अनसुना किया जा रहा है।
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अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में वर्ष 1997 में ऋषिकेश तहसील का गठन हुआ था। राज्य गठन के बाद से ही ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग के सीमावर्ती क्षेत्र को मिलाकर पृथक जिले के गठन मांग उठने लगी थी, लेकिन वर्ष 2014 में ऋषिकेश के आधे भाग को डोईवाला तहसील में शामिल कर लिया गया। इसके बाद भी ऋषिकेश जिला बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पृथक जिले की मांग समय-समय पर जोर पकड़ती रही है। असल में मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र ऋषिकेश से सटा हुआ है। मुनिकीरेती टिहरी गढ़वाल जिले और स्वर्गाश्रम पौड़ी गढ़वाल जिले का हिस्सा है। भौगोलिक, प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की असमानता के कारण दोनों ही क्षेत्रों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। गौरतलब है कि मुनिकीरेती क्षेत्र के लोगों को जरूरी काम के लिए जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 111 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वहीं स्वर्गाश्रम क्षेत्र के लोगों की दुश्वारियां भी कम नहीं हैं। यहां लोग 147 किलोमीटर की लंबी दूरी को तय कर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। तीनों जिलों में पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था भी अलग-अलग है। इससे कई बार देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी असमंजस के चलते दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। यही कारण है कि स्थानीय लोग ऋषिकेश, मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम के लोग लगातार को मिलाकर पृथक जिले के गठन की मांग कर रहे हैं ताकि ऋषिकेश को पर्यटन जिले के तौर पर विकसित किया जा सके, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह मुद्दा अब तक किसी भी राजनीतिक दल के घोषणापत्र का हिस्सा नहीं बन पाया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रत्याशी भी लोगों की इस बड़ी मांग को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा गायब है। संवाद
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