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37 दिन से अनशन पर बैठे संत आत्मबोधानंद को एम्स में कराया भर्ती, बोले सानंद की तरह जिंदा नहीं लौटूंगा

Fri, 30 Nov 2018 08:22 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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संत आत्मबोधानंद को उठाकर ले जाती पुलिस
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गंगा रक्षा के लिए बीते 37 दिनों से अनशन कर रहे मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को प्रशासन ने जबरन उठाकर ऋषिकेश एम्स भर्ती करा दिया है। आत्मबोधानंद ने जबरन उठाकर ले जाने का काफी विरोध किया, लेकिन उनकी एक नहीं चली। वहीं स्वामी शिवानंद का कहना है कि वे पुलिस प्रशासन की टीम पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराएंगे।

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मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद गंगा रक्षा के लिए 24 अक्तूबर से अनशन कर रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर 2.30 बजे एसडीएम मनीष कुमार सिंह, सीओ स्वप्न किशोर और तहसीलदार सुनैना राणा पुलिस बल के साथ मातृ सदन पहुंचे।

अधिकारियों के आते ही मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद भड़क गए। इस दौरान उन्होंने आश्रम में धारा 144 लगाना नियमों के विरुद्ध बताया। इसके बाद एसडीएम ने स्वामी शिवानंद से ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को ले जाने की अनुमति मांगी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर आत्मबोधानंद को जबरन उठाकर एंबुलेंस में बैठा दिया गया।

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जिंदा नहीं लौटूंगा मैं...

एसडीएम मनीष कुमार सिंह ने बताया कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद काफी दिनों से अनशन पर हैं और स्वास्थ्य की जांच भी नहीं करवा रहे। उनकी जीवन रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है।

उधर, मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि आत्मबोधानंद ने उनके 15 प्रश्नों के उत्तर देने वाले डॉक्टरों से ही उपचार कराने मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि स्वामी सानंद की तरह आत्मबोधानंद भी एम्स ऋषिकेश में सुरक्षित नहीं हैं। 

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने कहा कि जिस प्रकार स्वामी सानंद को जबरन उठाकर ले जाया गया था, उन्हें भी उसी तरह ले जाया जा रहा है। एम्स में उनका जीवन सुरक्षित नहीं है और अब एम्स से जीवित लौटने की उम्मीद नहीं है, लेकिन अंतिम सांस तक गंगा की रक्षा के लिए उनका अनशन जारी रहेगा। 
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अधिकारियों की संपत्ति की हो जांच 

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए शासन और प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने भी अभी तक वार्ता करने का प्रयास नहीं किया।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, एसडीएम मनीष कुमार सिंह और तहसीलदार सुनैना राणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर, इनकी संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए।
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