पिता के डंगरिया के साथ जागर में देव गीत गाने और घर में उसका गुणगान किए जाने का परिणाम यह हुआ कि कांस्टेबल योगेंद्र की ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ गई।
यही नहीं, उन्होंने कुमाऊंनी में दो सौ पन्नों की रामायण और चार सौ पन्नों की महाभारत भी लिख ली। रामायण का विमोचन मुख्यमंत्री के हाथों हो चुका, लेकिन महाभारत अभी तक छपी नहीं है।
मूलरूप से जिला चंपावत, विकास खंड पाटी के ग्राम गरसाड़ी निवासी भवानी दत्त बिष्ट के पुत्र योगेंद्र दत्त बिष्ट 1990 में पुलिस में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने 1996-97 में हिंदी से एमए किया।
पिता भवानी दत्त पूजा पाठ के साथ ही मंदिरों में लगने वाले जागरों में गीत गाते थे। अक्सर जागरों में गाए जाने वाले देव स्तुति गीतों को वे घर में सुबह शाम गाया करते थे। इससे योगेंद्र की भी ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ गई। तब वे सोचते थे कि भगवानों के लिए समर्पित कुछ ऐसा काम किया जाए, जिसे लोग याद रखें।