एसओ संजीव थपलियाल ने बताया कि महमूद तमंचे बनाने का पुराना कारीगर है। वह वर्ष 2012 में भी तमंचे बनाने के आरोप में भगवानपुर थाने से जेल जा चुका है। छह महीने पूर्व वह सहानपुर के थाना फतेहपुर से तमंचे बनाने के मामले में भी जेल जा चुका है जबकि छोटा लकड़ी चोरी में वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत और मारपीट के मामले में जेल जा चुका है। दोनों वर्तमान में जमानत पर बाहर थे। छोटे के खिलाफ वाइल्ड लाइफ एक्ट के मामले में कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किए थे।
75 साल का हो चुका है महमूद
महमूद का पुराना आपराधिक इतिहास है। भले ही वह तमंचे बनाने के मामले में पहले भी जेल जा चुका है, लेकिन 75 साल की उम्र में भी ज्यादा पैसा कमाने की उसकी कसक कम नहीं हुई। उम्रदराज होने के बाद भी वह तमंचे बनाने के काम में लगा रहा। ग्रामीणों की मानें तो इतना बुजुर्ग होने पर लोग अब यह मानते थे कि उसने तमंचे बनाने का काम छोड़ दिया है। इसलिए वह रात के समय में कहां जाता था, कोई शक नहीं करता था। लेकिन, अब भी वह अवैध काम करता है, इसकी जानकारी शनिवार की रात लोगों को हुई।
यूपी तक सप्लाई होते हैं तमंचे
पुलिस सूत्रों की मानें तो छोटा और महमूद के कनेक्शन वेस्ट यूपी तक हैं। वे तमंचा बनाने के बाद सप्लायर के जरिये वेस्ट यूपी में तमंचे सप्लाई करते थे। इतना ही नहीं डिमांड पर भी एडवांस में पैसे लेकर 32 बोर का तमंचा तैयार करते थे। दोनों की अवैध हथियारों का कारोबार करने वाले वेस्ट यूपी के लोगों से अच्छी जान पहचान है। इसके चलते ही वह आसानी से तमंचे बेच रहे थे, लेकिन वह पुलिस की आंखों में ज्यादा दिन धूल नहीं झोंक सके और आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंच गए।