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फौजियों को नहीं रास आई PM के मन की बात

Mon, 01 Jun 2015 11:25 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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पीएम नरेंद्र मोदी की मन की बात में वन रैंक वन पेंशन लागू करने में देरी का इशारा करने से पूर्व सैनिकों में रोष गहरा गया है।
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अपने मेडल तक लौटा कर बरसों से वन रैंक वन पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे फौजी दोबारा आंदोलन की राह पर जा सकते हैं।
रविवार को पूर्व सैनिकों मेजर जनरल लालजी सिंह, ब्रिगेडियर केजी बहल, कर्नल एमएमपी काला, कर्नल पीएल पराशर, कर्नल बीएम थापा (रि) ने पत्रकार वार्ता में कहा कि तीस वर्षों से पूर्व सैनिक संघर्ष कर रहे हैं।

यूपीए सरकार ने वन रैंक वन पेंशन को प्रभावी बनाने के लिए पांच सौ करोड़ का बजट प्रावधान किया। 1 अप्रैल 2014 से लागू होना था, लेकिन अभी तक मामला लटका हुआ है। 95 फीसद सैनिक 32 से 45 वर्ष की आयु के बीच रिटायर हो जाते हैं। वन रैंक वन पेंशन पर गठित कमेटी की सिफारिश को छठे वेतन आयोग ने खारिज कर दिया।
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एनडीए सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक हजार करोड़ का प्रावधान किया, लेकिन लागू करने के लिए लगभग दस हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्व सैनिकों में आस जगाई थी, जिसपर वह खरे नहीं उतरे हैं। पूर्व सैनिकों अब दोबारा आंदोलन की राह पर चलने की तैयारी में हैं।
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कोर्ट की अवमानना
वन रैंक वन पेंशन को लेकर दाखिल याचिका के तहत 1 जुलाई 2015 से पहले केंद्र को इसे लागू करना है। अगर पूर्व सैनिकों को समान पद पर समान पेंशन नहीं मिली तो कोर्ट की अवमानना झेलनी पड़ सकती है। 1 जनवरी 2006 से पूर्व रिटायर हुए सैनिकों की वर्तमान में रिटायर होने वालों के बराबर पेंशन दी जानी है।
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