सीएम के नामांकन भरने के बाद ही भाजपा बूथ प्रबंधन में जुट गई। पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बूथों की जिम्मेदारी दी गई। पन्ना प्रमुख का फार्मूला चंपावत उपचुनाव में भाजपा ने कायदे से लागू किया। पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार कई दिन वहां डेरा जमाए रहे। बकौल, अजेय कुमार, इस जीत में बूथ प्रबंधन की रणनीति ने काम किया। लोगों में मुख्यमंत्री धामी के प्रति खास लगाव देखने को मिला। लोग चंपावत का विकास चाहते हैं, ये उन्होंने रिकॉर्ड मत देकर साबित कर दिया है।
सियासी जानकारों के मुताबिक, 2024 के लोक सभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के लिए चंपावत उपचुनाव के खास मायने हैं। यह उपचुनाव में मिली जीत है, लेकिन समर में जो दुर्दशा कांग्रेस की हुई है वह कहीं न कहीं विरोधियों का मनोबल तोड़ने और भाजपा के कैडर का मनोबल बढ़ाने में मददगार बन सकती है। भाजपा की चुनावी रणनीति के आगे कांग्रेस कहीं ठहर नहीं पाई।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा पार्टी के उपचुनाव में अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के लिए बेशक सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, लेकिन इस पराजय उसकी तैयारियों की पोल खोल दी है। इस करारी शिकस्त ने साफ कर दिया कि कांग्रेस अब तक अपने भीतर के संघर्ष और गुटबाजी से उभर नहीं पाई है। उसकी प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी का महज 5.16 फीसदी वोटों पर सिमट जाना राज्य की दूसरी बड़ी पार्टी के मनोबल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला है।