फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड सरकार के इस कदम से नाराज बाबा केदारनाथ!

Wed, 03 Feb 2016 08:34 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
सर्व मासम देवते पूज्या, सर्व मासम मानवे सथा। स्कंदपुराण के इस श्लोक का अर्थ है कि बदरीनाथ-केदारनाथ में छह महीने देवता और छह महीने मनुष्य पूजा करेंगे।
विज्ञापन


नारद पुराण में भी इसका जिक्र है। इसके बावजूद लगातार मनुष्यों को केदारनाथ भेजा जा रहा है। ऐसे में तीर्थ-पुरोहित, महंत, इतिहासकार सभी को डर है कि कहीं बाबा केदार नाराज ना हो जाएं। हाल ही में पर्यटन विभाग की ओर से सहस्त्रधारा हैलीपैड से सीधे केदारनाथ के लिए केदार दर्शन यात्रा शुरू की गई है।

वहां आधे घंटे का समय भी बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए दिया जा रहा है। यही नहीं, प्रदेश सरकार 25 से 29 फरवरी के बीच केदारनाथ में केदार महोत्सव आयोजित करने जा रही है।
विज्ञापन


ऐसे में हिंदू धर्म के जानकारों ने शीतकाल में केदारनाथ में मनुष्यों के प्रवेश और महोत्सव पर आपत्ति जताई है। इन लोगों का मानना है कि केदार-महोत्सव के दौरान ढोल-दमाऊ बजाए जाने से देवता नाराज हो सकते हैं।
विज्ञापन

तीर्थ पुरोहित मुख्यमंत्री से करेंगे बात

शीतकाल के छह महीने सभी धामों में देवता वास करते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में मानवों की गतिविधि निषिद्ध होती है। इसके बावजूद केदारनाथ में मनुष्यों का आवागमन कराया जा रहा है। हम इसका विरोध करते हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री से भी वार्ता की जाएगी।
- श्रीनिवास पोस्ती, तीर्थ पुरोहित एवं पदाधिकारी केदार महासभा

धर्म-शास्त्रों के अनुसार शीतकाल में मानवों का केदारनाथ जाना उचित नहीं है। इन छह महीनों में वहां देवकार्य होते हैं। भगवान नारद देवों की पूजा करते हैं। वर्षों पुरानी परंपरा तोड़ा जाना उचित नहीं है।
- महंत किशन गिरी

पुरातनकाल से चली आ रही परंपरा को तोड़ना सही नहीं है। पुराणों-ग्रंथों में जो लिखा है वह देवताओं की वाणी है। मानव केदारनाथ जाकर देवताओं के कार्यों और आराम में खलल डाल रहे हैं। यही कारण है कि हमें प्रकृति का प्रकोप झेलना पड़ रहा है। सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
- गोपाल भारद्वाज, इतिहासकार

बदरी-केदार मंदिर समिति भी धर्म-शास्त्रों की बात मानती है। देवताओं के समय में मनुष्यों के लिए पूजा का विधान नहीं है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात हुई थी। यही वजह है कि केदार-महोत्सव को डिजास्टर मैनेजमेंट एक्टिविटी के रूप में मनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस बीच बर्फ पर कुछ एक्टिविटी होंगी। तीर्थ-पुरोहितों और धर्म-शास्त्रों की भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा।
- बीडी सिंह, सीईओ, बदरी केदार मंदिर समिति
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें