प्रभागीय वन अधिकारियों से फायर सीजन से इतर जंगल की आग के नियंत्रण के लिए होने वाले खर्च का ब्योरा भी मांगा गया है। वन विभाग फायर सीजन में करीब 25 करोड़ खर्च करता है।
यह फायर वाचर की तैनाती, पेट्रोलिंग, फायर लाइन, उपकरण, वाच टावर, कंट्रोल टावर आदि पर खर्च किया जाता है। यह साल भर जारी रहे तो यह खर्च चार गुना हो जाएगा। वन मंत्रालय की ओर से फायर सीजन को साल भर जारी रखने का प्रस्ताव है।
सोमवार को भी दो घटनाओं की जानकारी
वन विभाग की ओर से जारी एलर्ट के मुताबिक सोमवार को भी दो स्थानों पर वनाग्नि की घटनाएं सामने आईं। एक घटना उत्तरकाशी के भागीरथी सर्किल की मुखेम रेंज की है। दूसरी घटना टिहरी गढ़वाल में रुद्रप्रयाग डिवीजन की है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दोनों में आग बुझाने की कोशिश जारी है।
सर्दी में भी जंगल की आग के मामलों को देखते हुए वन विभाग ने अपने सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है। इसके साथ ही कहा गया है कि साल भर के फायर सीजन में होने वाले खर्च के लिए भी प्रस्ताव बनाकर दें।
बर्फबारी का मौसम होने के बाद भी प्रदेश में जंगल धधक रहे हैं। हालांकि अभी तक वनाग्नि का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है, लेकिन 175 हेक्टेयर से अधिक का जंगल किसी न किसी रूप में इसकी चपेट में आ गया है। प्रदेश में वनाग्नि के मामलों को देखते हुए फायर सीजन फरवरी से लेकर 15 जुलाई तक का है।
इस दौरान जंगल की आग के अधिक मामले भी सामने आते हैं। इस बार सर्दियों में भी वनाग्नि के मामले सामने आ रहे हैं। इसी को देखते हुए प्रभागीय वनाधिकारियों से कहा गया है कि वे हर जंगल की आग पर निगाह रखें और वन पंचायतों, स्थानीय लोगों का सहयोग लेकर आग को बुझाने में तत्परता दिखाएं।
सभी डीएफओ और अन्य वन अधिकारियों से कहा गया है कि जंगल की आग को लेकर अतिरिक्त सचेत रहें। आग लगने पर वन पंचायत, स्थानीय सहयोग से बाग पर काबू पाने का प्रयास करें। जंगल में इस समय लग रही आग हैरान करने वाली है और यह मौसम बदलाव की वजह से है। इसे देखते हुए ही फायर सीजन साल भर का होने का प्रस्ताव तैयार किया है।
-डॉ.हरक सिंह रावत, वन मंत्री उत्तराखंड