उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इस मामले में उनका दृष्टिकोण स्पष्ट व सराहनीय है। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि परंपराओं के साथ हैं और परंपराओं को पथभ्रष्ट नहीं होने देना चाहते हैं।
बाबा हठयोगी के बयान पर मैं कोई टिप्पणी कर विवाद नहीं बढ़ाना चाहता हूं। उन्होंने अपने बौद्धिक स्तर के हिसाब से टिप्पणी की है। पहले भी वे अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानदास पर अनर्गल टिप्पणी करते रहते थे। मैं अब भी अपनी बात पर अटल हूं। कुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े के साथ ही शाही स्नान करूंगा। सही समय और आवश्यकता पड़ने पर जवाब भी दूंगा।
-श्रीमंहत हरि गिरि, महामंत्री, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
किन्नर अखाड़े को भी कुंभ में स्नान का पूरा अधिकार है। इससे पूर्व भी कुंभ में जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े ने स्नान किया था। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि पहले ही कह चुके हैं कि किन्नर अखाड़ा को शाही स्नान करना चाहिए। अब अखाड़ा परिषद को इस विवाद को सुलझाकर फिर से बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
-महंत रविदेव शास्त्री, महामंत्री, युवा भारत साधू समाज
सभी को अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि महाराज के किन्नर अखाड़ा को शाही स्नान की अनुमति मिलने का समर्थन करना चाहिए। यह कोई विवादित विषय नहीं है। पहले भी किन्नर अखाड़ा कुंभ में स्नान कर चुका है।
-महंत दिनेश दास शास्त्री, पीठाधीश्वर, श्रीराम निवास आश्रम
किन्नर अखाड़े को 14वें अखाड़ा के रूप में मान्यता देना गलत है। किन्नर अखाड़ा कुंभ में जूना अखाड़े के साथ स्नान करे, इसमेें किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
-स्वामी आलोक गिरि, पीठाधीश्वर, नर्मादेश्वर महादेव
किन्नर अखाड़े को मान्यता मिलनी चाहिए। उनको भी अन्य अखाड़ों के भांति शाही स्नान का पूरा अधिकारी है। अखाड़ा परिषद को किन्नर अखाड़े का मान्यता देते हुए विवाद का पटाक्षेप करना चाहिए।
-स्वामी सुतीक्ष्ण महाराज, परमाध्यक्ष, जगद्गुरु उदासीन आश्रम