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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021: गहराया विवाद, अब बाबा हठयोगी बोले- किन्नर अखाड़े को नहीं मिलेगी मान्यता

Mon, 04 Jan 2021 11:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • पूर्व प्रवक्ता ने वर्तमान अखाड़ा परिषद के गठन को ही असांविधानिक ठहराया
  • कहा- महामंत्री दे सकते हैं इस्तीफा, लेकिन किन्नर अखाड़ा अलग से नहीं करेगा स्नान 
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महा कुंभ मेला 2021 - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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किन्नर अखाड़े को हरिद्वार कुंभ में 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता और शाही स्नान के अधिकार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी ने कहा है कि यदि महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि पद पर नहीं रहना चाहते हैं तो इस्तीफा दे सकते हैं। इस पर किसी को एतराज नहीं होगा, लेकिन सदियों से चली आ रही अखाड़ा परंपरा का उल्लंघन कर किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं दी जा सकती है।

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सोमवार को जारी प्रेस बयान में दिगंबर अणी अखाड़े के स्थानीय प्रतिनिधि बाबा हठयोगी ने कहा कि वर्तमान अखाड़ा परिषद का गठन ही असांविधानिक है। अध्यक्ष और महामंत्री दोनों वरिष्ठ पदाधिकारी सन्यासी अखाड़ों से संबद्ध हैं, जो अखाड़ा परिषद के संविधान के विपरीत है। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित अखाड़ा परंपरा का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा। सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत केवल 13 अखाड़ों को ही मान्यता प्राप्त है। तीन बैरागी अणियों में 18 अखाड़े शामिल हैं, लेकिन सभी बैरागी अखाड़े तीनों अणियों के साथ ही कुंभ मेले में शाही स्नान करते हैं।

श्रीमहंत हरि गिरि चाहें तो जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े को भी स्नान करा सकते हैं, लेकिन किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं दी सकती है। सरकार और मेला प्रशासन के पास उपलब्ध कुंभ मेला संबंधी रिकॉर्ड में भी केवल 13 अखाड़ों का उल्लेख है। वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में तत्कालीन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के समक्ष भी किन्नर अखाड़े के रूप में 14वां अखाड़ा गठित करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने परंपराओं का पालन करते हुए इसे ठुकरा दिया था।

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इन्होंने भी रखी अपनी राय

उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इस मामले में उनका दृष्टिकोण स्पष्ट व सराहनीय है। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि परंपराओं के साथ हैं और परंपराओं को पथभ्रष्ट नहीं होने देना चाहते हैं।

बाबा हठयोगी के बयान पर मैं कोई टिप्पणी कर विवाद नहीं बढ़ाना चाहता हूं। उन्होंने अपने बौद्धिक स्तर के हिसाब से टिप्पणी की है। पहले भी वे अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानदास पर अनर्गल टिप्पणी करते रहते थे। मैं अब भी अपनी बात पर अटल हूं। कुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े के साथ ही शाही स्नान करूंगा। सही समय और आवश्यकता पड़ने पर जवाब भी दूंगा। 
-श्रीमंहत हरि गिरि, महामंत्री, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

किन्नर अखाड़े को भी कुंभ में स्नान का पूरा अधिकार है। इससे पूर्व भी कुंभ में जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़े ने स्नान किया था। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि पहले ही कह चुके हैं कि किन्नर अखाड़ा को शाही स्नान करना चाहिए। अब अखाड़ा परिषद को इस विवाद को सुलझाकर फिर से बीच का रास्ता निकालना चाहिए।  
-महंत रविदेव शास्त्री, महामंत्री, युवा भारत साधू समाज

सभी को अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमंहत हरि गिरि महाराज के किन्नर अखाड़ा को शाही स्नान की अनुमति मिलने का समर्थन करना चाहिए। यह कोई विवादित विषय नहीं है। पहले भी किन्नर अखाड़ा कुंभ में स्नान कर चुका है। 
-महंत दिनेश दास शास्त्री, पीठाधीश्वर, श्रीराम निवास आश्रम   

किन्नर अखाड़े को 14वें अखाड़ा के रूप में मान्यता देना गलत है। किन्नर अखाड़ा कुंभ में जूना अखाड़े के साथ स्नान करे, इसमेें किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।  
-स्वामी आलोक गिरि, पीठाधीश्वर, नर्मादेश्वर महादेव

किन्नर अखाड़े को मान्यता मिलनी चाहिए। उनको भी अन्य अखाड़ों के भांति शाही स्नान का पूरा अधिकारी है। अखाड़ा परिषद को किन्नर अखाड़े का मान्यता देते हुए विवाद का पटाक्षेप करना चाहिए।
-स्वामी सुतीक्ष्ण महाराज, परमाध्यक्ष, जगद्गुरु उदासीन आश्रम 
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