कारागार में लगाए जाने वाले फोन पर बात करने के लिए अलग से एक बूथ बनाया जाएगा। इसके अलावा बंदी को जेल में अपने दो नंबरों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ये दो नंबर जेलर के पास रहेंगे। इन्हीं दो नंबरों पर बंदी बात कर पाएगा। दोनों नंबरों की ये शर्त होंगी कि ये पोस्टपेड होने चाहिए। जेल के फोन से प्रीपेड नंबरों पर बात नहीं हो पाएगी। बंदी दिन में दो बार ही इन दो नंबरों पर परिजनों या अपने वकील से बात कर सकता है।
फोन कॉल की होगी रिकार्डिंग
सूबे की सभी जेलों में लगाए जाने वाले फोन से बंदी किससे और क्या बात कर रहा है, यह सबकुछ रिकार्ड होगा। अधिकारियों के मुताबिक फोन में बंदी द्वारा की जानी वाले सभी बातें रिकार्ड होती रहेंगी। किसी भी तरह की गड़बड़ होने पर बंदी की बातें रिकार्ड के माध्यम से पुलिस को सुनवा दी जाएंगी। अगर कोई गड़बड़ी मिलेगी तो बंदी और बात करने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जेल में मजदूरी से होगा भुगतान
जेल अधिकारियों के मुताबिक, बंदियों के लिए पीसीओ की सुविधा बीएसएनल की ओर से दी जाएगी। कॉल करने का पूरा खर्च बंदी या उसके परिजनों को खुद ही उठाना होगा। इसके लिए बंदी जेल में अपनी मजदूरी से पैसा कटवा सकता है या फिर उसके परिजनों को कॉल के आधार पर एडवांस में जेल में यह रकम जमा करवानी होगी। इसके बाद ही बंदी पीसीओ का प्रयोग कर सकेगा।
जेल अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक पीसीओ की सुविधा प्रदेश में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में ही शुरू की गई है। इसके अलावा अभी तक यह सुविधा प्रदेश की किसी की जेल में नहीं है।
प्रदेश की अन्य जेलों में यह सुविधा देने के लिए पिछले सप्ताह आईजी जेल डॉ. पीवीके प्रसाद की ओर से सभी जेलरों की बैठक ली गई थी। इसमें साफ निर्देश दिए गए हैं कि नए साल में यह सुविधा अपने यहां लागू की जाए।
अभी तक जेल में बंदियों के लिए पीसीओ की सुविधा सुद्धोवाला जेल में शुरू की गई है। प्रदेश की सभी जेलों में यह सुविधा नए साल में लागू करने के लिए सभी जेलरों को पत्र भेजा गया है। पिछले सप्ताह इस संबंध में सभी जेलरों की बैठक भी ली गई थी। इसमें पीसीओ की सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. पीवीके प्रसाद, आईजी जेल