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अस्पतालों में दर्द से कराहेंगे मरीज

Sun, 10 Nov 2013 10:38 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में फार्मेसिस्ट रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। यह हड़ताल पहाड़ी जिलों के मरीजों पर सबसे भारी पड़ेगी।
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यहां 80 प्रतिशत से अधिक अस्पताल फार्मेसिस्टों के ही भरोसे चल रहे हैं। इमरजेंसी सेवाएं ठप होने से मैदानी जिलों में भी इसका खतरनाक असर होगा। रैबीज और हैपेटाईटिस जैसे जीवनरक्षक इंजेक्शन भी नहीं लगेंगे। दवा मिलना पहले से बंद है। अब तक बीपीएल मरीज इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

लैब टेक्नीशियनों की महीने भर से चल रही हड़ताल अलग मुसीबत बनी हुई है। करीब दो महीने से चरणबद्ध हड़ताल कर रहे फार्मेसिस्टों ने तीन दिन के कार्य बहिष्कार के बाद रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। कार्य बहिष्कार के दौरान चालू रखी गई इमरजेंसी सेवाओं को भी ठप कर दिया जाएगा।
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इमरजेंसी में भी काम नहीं करेंगे
देहरादून में तीन दिन के कार्य बहिष्कार के बाद शनिवार को फार्मासिस्टों ने रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। अब फार्मासिस्ट इमरजेंसी में भी काम नहीं करेंगे। कार्य बहिष्कार के दौरान फार्मासिस्ट इमरजेंसी में काम कर रहे थे। इसी के साथ लैब टेक्नीशियन भी हड़ताल पर अड़े हुए हैं।

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मरीजों को अब सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के साथ इमरजेंसी में भी फार्मासिस्टों की सेवाएं नहीं मिलेंगी। ओपीडी में आने वाले रोगियों को दवाएं नहीं मिल पाएंगी। इंडोर में भरती मरीजों के लिए अस्पताल प्रबंधन दवाओं की व्यवस्था कर रहा है। नर्स स्टाफ का कहना है कि भरती मरीजों के लिए दवा स्टोर कर ली गई है। तीन-चार दिन मरीजों का आराम से काम चल जाएगा।

नहीं हो पा रही पैथोलोजिकल जांचें
इसके साथ लैब टेक्नीशियन भी हड़ताल पर अड़े हुए हैं। इसकी वजह से ओपीडी में आने वाले मरीजों की पैथोलोजिकल जांचें नहीं हो पा रही है। रोगियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोगी मजबूरी में निजी पैथोलोजियों में जा रहे हैं।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डीपी थपलियाल ने बताया कि तयशुदा कार्यक्रम के तहत आंदोलन चल रहा है। अगर मांगें मान ली जाती हैं तो आंदोलन वापस हो जाएगा। दून ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ. एलके गुसाईं ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था कर ली जाएगी। मरीजों को कोई परेशानी नहीं होगी।

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