स्वास्थ्य विभाग के लिए फार्मासिस्ट की मांगों को मानने का दबाव तो है, लेकिन शासन स्तर पर सभी प्रस्तावों पर मोहर लगना आसान नहीं है। फार्मासिस्टों के स्केल रिवीजन के प्रस्ताव से विभाग पर मासिक 45 लाख रुपये का भार विभाग पर पड़ेगा।
यह प्रस्ताव पहले भी शासन ने वित्त को भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। ढांचा पुनर्गठन कर संवर्ग में निदेशक पद सृजित करना और कुल पदों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव में तो करोड़ों के वित्तीय बोझ के साथ सेवा नियमावली संशोधन तक करने होंगे।
तबादलों से प्रस्तावों का निस्तारण नहीं
फार्मासिस्ट संवर्ग का ढांचा पुनर्गठित करने, वेतनमानों का उच्चीकरण, उपकेंद्रों में तैनात फार्मासिस्टों को चिकित्सालयों में स्थानांतरित करने, फार्मासिस्टों को दवा लिखने का अधिकार देने संबंधी स्पष्ट आदेशों केप्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं।
हालांकि शासन में प्रमुख सचिव और अपर सचिव के तबादलों से इन प्रस्तावों का निस्तारण नहीं हो पाया है। इसके बाद वित्तीय सहमति के लिए विभाग और नए पदों के सृजन के लिए न्याय की स्वीकृति के लिए भेजना होगा।
महानिदेशक स्वास्थ्य डा. जीपी जोशी ने बताया कि हमने फार्मासिस्टों की मांगों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए हैं।