कोसी नदी का पानी प्रदूषित है। यहां जानवरों और इंसान का मलमूत्र मिला है। पानी प्रदूषित होने के कारण हेपेटाइटिस की बीमारी हो रही है। यह बात पानी की जांच में सामने आई है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में जिला संक्रामक रोग विशलेषक अधिकारी नंदन कांडपाल ने कोसी नदी के पानी का सैंपल लिया था। पानी की जांच की गई तो उसमें जानवरों और इंसानों का मलमूत्र मिला।
कोसी नदी का पानी पीने योग्य नहीं था। कोसी नदी के पानी के कारण रामनगर में जनवरी में गंदा पानी पीने के कारण 32, फरवरी में 26 और मार्च में 10 लोग हेपेटाइटिस का शिकार हो चुके हैं। कांडपाल का कहना है कि गर्मियों में उल्टी, दस्त और पेट संबंधी बीमारियों के रोगी बढ़ सकते हैं। गंदे पानी की आपूर्ति होती रही तो लिवर और किडनी पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
जलसंस्थान नहीं दे रहा स्वास्थ्य विभाग को क्लोरीनेशन की रिपोर्ट
जिला संक्रामक रोग विशलेषक अधिकारी नंदन कांडपाल ने कहा कि नगर पालिका के शहरी क्षेत्र के विभिन्न स्टैंड पोस्ट पर कितनी क्लोरीन पानी में हैं इसकी रिपोर्ट जलसंस्थान की ओर से नहीं दी जाती है। जल संस्थान यह भी नहीं बताता है कि कितनी क्लोरीन मिलाई गई है।
नगर पालिका की टीम के साथ मिलकर पानी के सैंपल लेकर जांच कराई जाती है। क्लोरीन की मात्रा की भी जांच होती है। साथ ही रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है।
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पीके त्यागी, अधिशासी अभियंता, जलसंस्थान रामनगर
पानी के सैंपल की जांच बराबर होती है और रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाती है। जिला संक्रामक रोग विशलेषक अधिकारी चाहें तो अधिशासी अभियंता रामनगर से बात करके सैंपल की रिपोर्ट ले सकते हैं। पानी में क्लोरीन की मात्रा की जांच भी बराबर कराई जाती है।
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डीके मिश्रा महाप्रबंधक जल संस्थान