राजधानी में विधानसभा सत्र आज से शुरू होने जा रहा है। एक बार फिर हमेशा की तरह जनता को परेशानी भुगतने को मजबूर होना पड़गा।
खास तौर पर राजधानी में किसी-न-किसी काम से पहुंचने वाले आस-पास के लोगों को गंतव्य स्थल तक पहुंचने में पापड़ बेलने पड़ेंगे, तय है। हमेशा की तरह डिफेंस कालोनी के रहने वालों को बेरिकेडिंग के बीच से खुद को चोट लगने से बचाते गुजरना होगा तो वहीं सत्र के दौरान होने वाले जुलूस, धरना-प्रदर्शन नन्हें बच्चों, बुजुर्गों की मुसीबत बनेंगे।
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अगर इस बीच किसी मरीज को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा तब तो फंसे ही समझिए। स्थानीय लोग इन मुसीबतों से जूझने को तैयार हैं, लेकिन इनका कहना है कि सत्र के दौरान आम जन से जुड़े मुद्दों की भी तो सुध ली जाए। इनकी राय में इन मुद्दों पर सरकार को घेरा जाना बनता है-
1. आपदा पुनर्वास, राहत सामग्री वितरण की स्थिति स्पष्ट करे सरकार
2. आपदा की वजह से बेरोजगार हुए लोगों के रोजगार के लिए क्या किया
3. पर्यटकों को आमंत्रित करने के लिए पर्यटक दिवस तो मनाएंगे लेकिन सुविधा कैसे दुरुस्त करेंगे
4. आपदा को देखते हुए उन्हें किसी तरह की दु:स्थिति से बचाने को क्या योजना है
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5. अभी तक कई जगहें सड़कें नहीं पहुंची हैं, वाहन जहां-तहां फंसे हैं, इस संबंध में क्या कर रहे हैं
6. आंदोलनकारियों को नौकरी में 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण के मामले में सरकार का रुख
7. राज्य आंदोलनकारियों को एक समान सम्मान पेंशन के मुद्दे को भी उठाया जाए
8. सर्वे जैसे कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन? सरकार जवाब दे
सरकार अपने अब तक के कार्यों पर श्वेत-पत्र जारी करे। बताए कि उसने अब तक क्या किया। अब तक किन कामों के लिए धनराशि प्रयोग की गई।
- भारती पांडे, भारत विकास परिषद
कई स्कूली बच्चे ऐसे थे, जिनका स्कूल आपदा की भेंट चढ़ गया। सरकार इन बच्चों को स्कूल और पढ़ाई मुहैया कराने के लिए क्या कर रही है, पूछना चाहिए।
- नितीश पंत, केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी
आंदोलनकारियों ने इसी 14 सितंबर को सीएम आवास कूच किया था। आंदोलनकारियों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठें, जिनकी बदौलत आज ये नेता राज कर रहे हैं।
- आरएल खंडूरी, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच
राहत सामग्री बांटने नारायणबगड़ के लिए निकल रहा हूं। इससे पहले राहत सामग्री के सही हाथों में न पहुंचने की बात सामने आ चुकी है। यह मुद्दा प्रमुखता से उठना चाहिए।
- एएस गुर्साईं, पूर्व सैनिक
एक समान सम्मान पेंशन की मांग भी पुराने समय से की जा रही है। यह मामला भी इस बार सदन में उठाया जाना चाहिए। निराकरण को समय सीमा भी तय हो।
- प्रदीप कुकरेती, आंदोलनकारी
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