11 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में पिंडर घाटी के लोग सोमवार को गुस्से में उबल पड़े। नारायणबगड़ से लेकर कुलसारी, हरमनी, थराली, देवाल और ग्वालदम में बाजार बंद रहे, जबकि सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में प्रार्थना के बाद लोगों ने स्कूल बंद करा दिए। नाराणबगड़ में हालात बेकाबू रहे।
बैंकों समेत अन्य विभागों में काम नहीं हो पाया। लोगों ने आरोपी को उनके हवाले करने, कड़ी सजा देने, बच्चियों की सुरक्षा बढ़ाने आदि की मांग को लेकर जुलूस प्रदर्शन किए।
सोमवार को नारायणबगड़ में सवा 11 बजे जीआईसी, जीजीआईसी के छात्र-छात्राओं के साथ भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष जुलूस निकालते हुए चौकी पहुंचे। गुस्साई भीड़ ने यहां नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कर्णप्रयाग पुलिस के एसओ पीसी भट्ट और एसएसआई प्रदीप राठौर और थराली के एसओ देवराज शर्मा मौके पर पहुंचे लेकिन गुस्साए लोग डीएम और एसपी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
शव वाहन रोका, एसडीएम के लिखित आश्वासन पर मानें
एसडीएम के लिखित आश्वासन पर मानीं भीड़
एक बजे पुलिस उपाधीक्षक जेसी यादव और डेढ़ बजे एसडीएम थराली मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण कड़ी कार्रवाई करने के लिखित आश्वासन और आरोपी को लोगों के हवाले करने की मांग पर अड़े रहे।
दो बजे बच्ची का शव यहां पहुंचा तो प्रदर्शनकारियों ने शव के वाहन को रोककर प्रदर्शन किया और कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग पर जाम लग गया। पौने पांच बजे एसडीएम अनूप कुमार नौटियाल ने क्षेत्र में बच्चियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का दायरा बढ़ाने, पटवारी पंती को निलंबित करने, मामले की चार्जशीट जल्द कोर्ट में दाखिल करने की मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण मान गए।
उन्होंने कार्रवाई न होने पर एक सप्ताह बाद फिर आंदोलन की चेतावनी देते हुए प्रदर्शन बंद किया। इस दौरान ब्लाक प्रमुख अंशी नेगी, ज्येष्ठ उपप्रमुख गंभीर सिंह, महीधर नैनवाल और अवतार सिंह फर्स्वाण, क्षेत्र पंचायत सदस्य उर्मिला रावत, ग्रामीण नारी शक्ति उत्थान समिति की अध्यक्ष ईशू रावत सहित महिलाएं, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और ग्रामीण मौजूद थे।
छात्राओं और महिलाओं ने चौकी में की तोड़फोड़
नारायणबगड़ में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चंद पीएसी और पुलिस के जवानों के भरोसे थी। भारी भीड़ के सामने ये सिपाही बेबस दिखे। स्थिति यह थी कि यहां एक एसआई तक नहीं था।
नतीजा यह रहा है कि गुस्साई छात्राएं और महिलाएं पुलिस चौकी में घुस गईं और तोड़ फोड़ की। बाद में कर्णप्रयाग के एसओ पीसी भट्ट और एसएसआई प्रदीप राठौर यहां पहुंचे।
पूरे दिन आंदोलन में महिलाएं सक्रिय थीं लेकिन यहां एक भी महिला कांस्टेबल नहीं थी। बाद में प्रमुख अंशी नेगी ने सीओ से महिला कांस्टेबल न होने का सवाल किया तो चार बजे यहां कुछ महिला सिपाही भेजी गईं।