इन्हें वायरल की शिकायत होने के कारण परिजनों को लगा कि बीमारी के चलते उनकी मौत हुई है। इसीलिए तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद विधायक गणेश जोशी ने पीड़ित परिवारों से मिलकर आर्थिक मदद की थी। शुक्रवार को भी मौत का सिलसिला नहीं थमा। अचानक तबीयत बिगड़ने पर आकाश (24), सुरेन्द्र (34) और इंदर (45) को हालत बिगड़ने पर दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर एक-एक कर उनकी मौत हो गई। तब जाकर हल्ला मचा कि इन सभी लोगों की मौत जहरीली शराब के सेवन से हुई है। इसे लेकर इलाके के लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।
लोगों ने पुलिस पर शराब बेचने वालों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। आक्रोशित महिलाओं ने शराब बेचने वालों के घरों में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान लोगों और पुलिस के बीच झड़प और हाथापाई भी हुई। मौके पर पहुंचे भाजपा विधायक गणेश जोशी ने सीओ सिटी शेखर सुयाल के साथ लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। हालांकि, देर रात तक महिलाओं का हंगामा जारी था।
बृहस्पतिवार को तीन लोगों की मौत हुई थी, जिसकी कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी गई। परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। रोजमर्रा शराब पीने वालों की शुक्रवार को तबीयत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर उपचार के दौरान तीन की मौत हो गई। पोस्टमार्टम होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मौत का क्या कारण है। फिलहाल पुलिस शराब बेचने वालों की धरपकड़ का प्रयास कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
-अरुण मोहन जोशी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
जहरीली शराब प्रकरण में शुक्रवार देर रात मरने वाले लोगों को शराब की आपूर्ति करने वाले गौरव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सीओ सिटी शेखर सुयाल ने अस्पताल में उपचाराधीन लोगों के बयान के आधार पर संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। गौरव के तार बिंदाल बस्ती में लंबे समय से सक्रिय शराब माफिया से जुड़ रहे हैं। राजनीति संरक्षण हासिल होने के कारण पुलिस इस माफिया के खिलाफ कार्रवाई से बचती रही है। यह स्थिति तब है, जब मुख्यालय कई बार उसके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
पथरिया पीर में शराब पीकर हुई छह लोगों की मौत के मामले में यह तथ्य उजागर हुआ था कि मरने वालों ने पड़ोसी गौरव से जाफरान शराब खरीदी थी। एसएसपी अरुण मोहन जोशी के मुताबिक सीओ सिटी शेखर सुयाल ने अस्पताल में उपचाराधीन बिमल, लीला और लक्की के बयान लिए, जिन्हाेंने गौरव से जाफरान शराब खरीदकर पीने की बात बताई है। इसी आधार पर गौरव के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। गौरव समेत अन्य लोगों की तलाश में पुलिस की दबिश चल रही है। कई संदिग्धाें को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
उधर आरोपी गौरव के तार बिंदाल बस्ती में सक्रिय शराब माफिया से जुड़ रहे हैं। इस माफिया के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। कुछ समय पहले माफिया ने एक राजनीतिक दल से नाता जोड़ लिया था। पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने करीब पांच माह पहले जिला पुलिस को इस माफिया के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। दबाव की राजनीति के चलते पुलिस उस पर हाथ डालने से कतराती रही। यह स्थिति तब थी, जब शराब के साथ पकड़े गए लोगों ने इस माफिया का नाम लिया था।
राजकीय गांधी शताब्दी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. प्रवीण पंवार ने बताया कि सामान्य शराब में एथिल एल्कोहॉल होता है। फरमनटेशन ठीक से न होने के कारण शराब में मिथाइल एल्कोहॉल बन जाता है। जिससे शराब जहरीली हो जाती है। लोकल बोली में जिसे कई जगह कच्ची शराब भी कहा जाता है, उसमें ऐसी संभावना ज्यादा रहती है। यह शराब शरीर में जाने पर यह फॉर्मिक एसिड बनाने लगती है। जो मानव सेल्स के लिए बहुत ही खतरनाक होता है। अगर ऐसी शराब पीने के दो से पांच घंटे की अवधि में मनुष्य की मौत होती है तो ज्यादातर मौत का कारण ब्रेन हैमरेज रहता है। जबकि किडनी फेल्योर और कई बार मल्टी ऑगर्न फेल्योर के चलते एक-दो दिन की अवधि में मौत होती है। यही नहीं व्यक्ति को अंधापन भी हो सकता है।
आईसीयू न मिलने पर दून से ले गए थे परिजन
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केके टम्टा ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी शराब पिए मरीज अस्पताल आए थे। आईसीयू खाली न होने के कारण परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए थे। वहीं, शुक्रवार को भी लक्की नाम के एक मरीज की हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया था। परिजन लक्की को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल लेकर गए। वहां से हालत गंभीर देखते हुए उसे एम्स रेफर किया गया है। इसके अलावा कर्ण और राजू भी शुक्रवार देर रात तक इसी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे। उधर, कोरोनेशन अस्पताल में पहुंचाए गए मरीज सुरेंद्र कुमार के डेथ मेमो में उसकी मौत का कारण डाक्टरों ने कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट दर्ज किया है। वहीं, शिवसेना के प्रदेश प्रमुख गौरव कुमार देर रात श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती मरीजों का हालचाल जानने पहुंचे। गौरव कुमार ने शराब माफिया और उन्हें संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उनके साथ शिवसेना के शिवम गोयल, वासू परविंदा, अमित कर्णवाल, शिव नारायण आदि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहरीली शराब से छह लोगों की मौत के मामले में न्यायिक जांच के आदेश के बाद मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने आबकारी आयुक्त को तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने जल्द जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए राज्य से बाहर गए हैं। आबकारी विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। उन्हें हादसे की सूचना दिल्ली में मिली, जिसके बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों से फोन पर जानकारी ली। उन्होंने न्यायिक जांच के आदेश देने के साथ मुख्य सचिव और डीजी को पूरे प्रकरण को लेकर सामने आने वाले तथ्यों से अवगत करवाने को कहा है। उन्होंने कहा कि राजधानी में इस तरह का हादसा चिंताजनक है। डीजी हेल्थ से उन्होंने अस्पतालों में भर्ती लोगों के तुरंत उपचार देने को कहा है। मुख्यमंत्री 22 सितंबर को राज्य में लौटेंगे।
वहीं जहरीली शराब से मौत के आरोपों के बीच एक बार फिर आबकारी विभाग निशाने पर है। राजधानी में जहरीली शराब किस तरह पहुंची यह बड़ा सवाल है? जिला आबकारी अधिकारी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। आबकारी आयुक्त सुशील कुमार ने सूूचना मिलते ही क्षेत्रीय निरीक्षक सुजात हसन, निरीक्षक (सतर्कता) मनोहर फर्तियाल और उप निरीक्षक मुकेश भट्ट को निलंबित कर दिया है। इसके साथ विस्तृत जांच के निर्देश जारी किए हैं। महकमा शराब सप्लाई की कड़ियां जोड़ने में लगा है। शराब, देसी शराब दुकान से खरीदी बताई जा रही है। ऐसे में क्षेत्र की सभी शराब दुकानों पर एहतियातन बिक्री रोक दी है। संबंधित बैच नंबर की शराब के सैंपल लिए हैं। शराब निर्माता फैक्टरी से भी सैंपल ले लिए गए हैं। उधर, शासन ने आबकारी आयुक्त, एसएसपी और जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। पुलिस से मतृकों के विसरा की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी स्पष्ट हो पाएगा कि मौत की असल वजह क्या थी।