आतिशबाजी और श्रीराम के जयकारों के साथ ही शहरभर में रावण दहन किया गया। इससे पहले मेघनाद और कुंभकरण के पुतले फूंके गए।
जगह-जगह मेले और खाने के स्टॉल लगे थे। कुछ जगहों पर लंका दहन भी किया गया। तय समय से देरी से ही पुतले फुंके गए।
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शहर का सबसे बड़ा रावण परेड ग्राउंड में बना था। यहां शाम 4 बजे से ही काफी भीड़ जुट गई थी। रावण फुंकने का समय शाम 6 बजकर पांच मिनट था। हालांकि रावण साढ़े छ: बजे फूंका गया। इससे पहले कुंभकरण और मेघनाद के पुतले फूंके गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीएम विजय बहुगुणा, सांसद तरूण विजय, विधायक हरबंस कपूर, मेयर विनोद चमोली आदि थे। यहां ग्राउंड तो खचाखच भरा हुआ ही था लेकिन बाहर रोड पर चारों ओर लोगों की भीड़ लगी थी लोग ग्राउंड की दीवार पर चढ़कर पुतलों को देख रहे थे।
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चारों ओर से गेट बंद कर दिए
समय से काफी पहले ही चारों ओर से गेट बंद कर दिए गए थे, इसके चलते लोग ग्राउंड के चारों ओर घूमकर अंदर प्रवेश करने का रास्ता ढूंढ रहे थे लेकिन कहीं से भी लोगों को घुसने नहीं दिया जा रहा था। परेशान लोग तो वहां पहुंचकर यही कह रहे थे कि बच्चों को जो दिखाने लाए थे वो तो देख नहीं पाए।
अंदर तो जाने ही नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में लोग मायूस होकर बाहर से ही लौट गए तो कईयों ने डूंगा हाऊस के बाहर और दूसरी जगहों से रावण को फुंकते देखा। रावण के फुंकते ही लोग घरों को दौड़ पड़े। लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल स्कूल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहे।
डांस कर सभी को भावुक कर दिया
नन्हीं बच्चियों ने ओ री चिरइया गाने पर डांस कर सभी को भावुक कर दिया, तो भक्ति के गीतों पर भी बच्चों ने नृत्य किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि वंशीधर भगत उपस्थित थे। यहां रावण जलने का समय सात बजे का था हालांकि आठ बजे के करीब रावण दहन किया गया।
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आयोजक सिद्धार्थ बंसल ने बताया कि बच्चों को संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से ही यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। झंडा बाजार तालाब में लंका दहन की गई। इससे पहले भव्य आतिशबाजी हुई।
नहीं उगली रावण ने आग
बन्नू बिरादरी की ओर से परेड ग्राउंड में आयोजित दशहरे कार्यक्रम को लेकर कई दिनों से कहा जा रहा था कि इस बार ग्राउंड में बनाए गए रावण के मुंह और सिर से आग निकलेगी। इसे देखने काफी संख्या में लोग ग्राउंड में जुटे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके चलते अंत तक जुटे लोग मायूस भी हुए और नाराज भी।
कुंभकरण को फूंका तो भागे लोग
परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के तहत सबसे पहले कुंभकरण को फूंका गया। बन्नू बिरादरी के लोगों ने कुंभकरण को फुंकते हुए जरा भी इस बात का ध्यान नहीं रखा कि उसके आसपास लोग खड़े हैं बस सीधे आग लगा दी। यह देख लोग तेजी से वहां से भागे।
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नहीं जली लंका तो हो गया मतभेद
रावण दहन से पहले परेड ग्राउंड में लंका फूंकी गई। लेकिन लंका एक बारी में नहीं जली तो तीन बारी में जाकर लंका सही से जल पाई। इस पर बिरादरी के ही लोग आपस में नाराज हो गए और अगली बार व्यवस्था दूसरे हाथों में देने की बात कहने लगे।
आतिशबाजी से हो सकता था नुकसान
हिंदू नेशनल स्कूल में एक ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे तो दूसरी ओर पुतलों के सामने आतिशबाजी चल रही थी। आतिशबाजी कभी लोगों के ऊपर आ जाती तो कभी मंच की ओर चली जाती। इसे देख बार-बार लोग परेशान हो रहे थे।
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आशाराम का पुतला जलाया
नेहरूकालोनी के लोगों ने द्वापर युग के रावण के साथ ही कलयुग के रावण का पुतला दहन किया। कलयुग के रावण के बदले लोगों ने कथा वाचक आशाराम का पुतला जलाया गया।
एच ब्लॉक के लोगों ने कुछ अलग अंदाज में रावण का दहन किया। रावण के साथ ही आशा राम का पुतले के भा दहन किया गया। इस अवसर परर भूपेंद्र कुमार, ज्ञान चंद्र सैनी, श्रीनाथ गुप्ता, गिरजा सिंह, लक्ष्मी, सरस्वती देवी, ममता, हेमा, संकुतला, वैभव आदि उपस्थित रहे।