अभी तक वाहनों के जाम में लोग फंसते थे, लेकिन शनिवार को लोगों की भीड़ में वाहन फंसे रहे। शाम के समय जत्थे पर जत्थे घरों से रावण दहन देखने निकले तो ट्रैफिक पुलिस के पसीने छूट गए।
व्यवस्था बनाने के लिए कई चौराहों पर ‘रेड लाइट’ को बीस मिनट तक ऑन रखा गया। इसके बावजूद कई चौराहों पर जाम लग गया।
यातायात व्यवस्था चरमरा गई
रावण वध में सरीख होने के बाद लोग वापस घर की तरफ चले तो एकबार फिर यातायात व्यवस्था चरमरा गई। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ही अधिकारियों ने भी सड़क पर उतरकर यातायात व्यवस्था बनाने की कोशिश की।
रविवार को शहर में एक साथ दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर रावण दहन किया गया। परेड ग्राउंड, ओएफडी ग्राउंड और प्रेमनगर में हर साल की तरह हजारों की संख्या में भीड़ जुटी। इससे पहले पुलिस का रूट डायवर्जन प्लान दोपहर से ही लागू हो गया था। शाम चार बजे लोग घरों से आयोजन स्थल की तरफ निकलने लगे।
सर्वे चौक पूरी तरह से पैक
शाम पांच बजे दर्शनलाल चौक, घंटाघर, एस्लेहाल, तहसील चौक, सर्वे चौक पूरी तरह से पैक हो गया। सैकड़ों की तादाद में लोग जब एक साथ चौराहे क्रास करते तो पुलिस को दूसरी तरफ के वाहनों को बीस मिनट तक रोकना पड़ता। वहीं रावण दहन के बाद एकबार फिर शहर में यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
जगह-जगह जाम से कई चौराहों पर वाहनों के पहिये पूरी तरह थम गए। पुलिस को डर भगदड़ की थी, इसलिए ट्रैफिक पुलिस और थानों की पुलिस लोगों को सकुशल आयोजन स्थल से निकालती रही।
एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा थी। एक साथ इतनी भीड़ सड़कों पर होने से चिंता होती है, इसलिए खुद अधिकारी भी सड़कों पर कई घंटे तक ड्यूटी देते रहे।