मुख्यमंत्री हरीश रावत के ड्रीम प्लान पर अफसरशाही की सुस्ती हावी हो गई है। सीएम विधवा, विकलांग, वृद्धावस्था पेंशन के अपने विशेष अभियान के पात्रों को योजना का फायदा दिलाने के लिए अफसरों को बराबर ताकीद कर रहे हैं, लेकिन इस ख्वाब की बदरौनक ताबीर तब उभर आई, जब समाज कल्याण विभाग में एक महिला विकलांग बेटी की पेंशन के लिए रो पड़ी।
एक बार भी पेंशन नहीं मिली
उसकी 19 वर्षीय विकलांग बेटी मीनाक्षी का पेंशन पट्टा मुख्यमंत्री के विशेष अभियान में बना था, लेकिन अब तक उसे एक बार भी पेंशन नहीं मिली।
कमलावती जिस वक्त रोई, राजधानी के जिला समाज कल्याण विभाग में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी दफ्तर बंद कर ‘अत्याचार मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे।
डीएल रोड की मीनाक्षी को पेंशन पट्टा का नंबर 8953 है। जो उसे जिला समाज कल्याण अधिकारी के दस्तखत से दिया गया था। स्टेट बैंक में उसका खाता भी खुला है। परिवार में पिता रोशन पक्षाघात से जूझ रहे हैं। यह बानगी सिर्फ मीनाक्षी की है, लेकिन यह पूरे प्रदेश के पेंशन पट्टा धारकों के हालात की तरजुमानी करती है।
28 अगस्त तक का समय दिया
जिले में कुल 70871 पेंशन पट्टा धारक हैं। मगर कितनों को पेंशन नहीं मिली? इसका जवाब विभाग में किसी के पास नहीं है। जिला समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह कहते हैं कि आधे लोगों को अभी पेंशन पहुंचानी है।
इसी सवाल पर समाज कल्याण निदेशक रणवीर सिंह चौहान बोले, अभी सही आंकड़ा मालूम नहीं है। जिला समाज कल्याण अधिकारियों को 28 अगस्त तक समय दिया है। सर्टिफिकेट जारी करें कि कितने लोगों को पेंशन मिली है, तभी पता लग पाएगा।