खानपुर से कांग्रेस विधायक प्रणव चैंपियन की लालबत्ती छिनवा कर प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) ने अपनी ताकत दिखा दी। सहयोगी होने के नाते सरकार में पीडीएफ का दबदबा है।
सरकार अपनी होते हुए भी कांग्रेसी खुद को हाशिए पर देख रहे हैं। हरिद्वार में कांग्रेसियों की चिंता भी यही है। वहां बसपा सरकार और सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल कर अपनी ताकत बढ़ाती जा रही है।
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मुख्य सचिव को हिदायत देनी पड़ी
शासन और प्रशासन में सहयोगी दलों की हनक के आगे कांग्रेसी कशमशा कर रह जा रहे हैं। न चाहते हुए भी पिछले दिनों बसपा कोटे से मंत्री सुरेंद्र राकेश के प्रोटोकाल मामले में मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव को हिदायत देनी पड़ी थी।
इसके बाद अपने ही विधायक को अनुशासनहीनता का नोटिस जारी करवाना पड़ा। फिर भी पीडीएफ के विधायक और मंत्री संतुष्ट नहीं हुए। आखिरकार दबाव में मुख्यमंत्री को चैंपियन की लालबत्ती उतरवाने का आदेश करना पड़ा। इस घटना केदूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे।
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सरकार पर दबाव बढ़ता जाएगा
पहला तो यह कि पीडीएफ के सदस्यों के हौसले और बढ़ेंगे और सरकार पर उनका दबाव बढ़ता जाएगा। दूसरा यह कि इससे कांग्रेसियों में और हताशा बढ़ेगी। हरिद्वार में बसपा के बढ़ते प्रभाव की बात कांग्रेसी राहुल गांधी के सामने भी उठा चुके हैं।
हरिद्वार से सांसद हरीश रावत की भी यही शिकायत रही है कि हरिद्वार प्रशासन उनको और कांग्रेसियों को खास तवज्जो नहीं देता। बल्कि बसपाईयों की ज्यादा सुनी जाती है। बसपा कोटे से मंत्री सुरेंद्र राकेश को गुंडा कहने के मामले में चैंपियन पर हुई कार्रवाई ने इस बात को और बल दे दिया है।
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अनुसूचित जाति प्लान में मंजूर राशि
हरिद्वार जिले से ही एक कांग्रेसी विधायक ने हाल ही में मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि उनके विधानसभा क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग के तहत अनुसूचित जाति प्लान में मंजूर राशि विभागीय मंत्री ने वापस लेकर दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। जबकि संबंधित राशि से प्रस्तावित निर्माण कार्य आरंभ भी हो चुका है।
अवैध खनन और व्यापार कर की चोरी कर रहे ट्रांसपोटर्स की सिफारिशों को लेकर भी तमाम मामले शासन और सरकार में पहुंच रहे हैं। लेकिन कांग्रेसियों की सुनवाई नहीं हो रही है। उनमें बढ़ रहा असंतोष और हताशा का असर आने वाले चुनावों में दिख सकता है।