प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के समर्थन से चल रही सरकार को चुनाव में उसके साथ की दरकरार है, लेकिन सतपाल महाराज के भाजपा में जाने से समीकरण बदले हैं।
सार्वजनिक मंच से पीडीएफ भले चुनाव में किसी पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष में नहीं जाने का बात कर रही है, लेकिन अल्मोड़ा सीट को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर पीडीएफ का दखल है।
अंदरखाने तो पीडीएफ के कांग्रेस के समर्थन की बात चल रही है लेकिन आखिर में पीडीएफ का ऊंट किस करवट बैठेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
महाराज के जाने से पीडीएफ पर पड़ेगा असर
दो राजनीतिक दलों सहित निर्दलीय विधायकों का गठबंधन पीडीएफ लोकसभा चुनाव में बंटता दिख रहा है। सतपाल महाराज के कांग्रेस छोड़ने के बाद पीडीएफ पर असर पड़ा है।
महाराज के करीबी और निर्दलीय विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी सरकार पौड़ी संसदीय सीट की देवप्रयाग विधानसभा से विधायक हैं।
मंत्री निर्दलीय चुनाव में उतरने से पहले कांग्रेस में रहे हैं, लेकिन इस बार पौड़ी संसदीय सीट से महाराज चुनाव में नहीं उतरे तो उनके पास विकल्प खुले हैं।
रावत के आने से बढ़ेंगी दिक्कतें
महाराज के इस्तीफे पर मंत्री कांग्रेस से नाराज हैं। हरक सिंह रावत को कांग्रेस से टिकट मिलने पर दिक्कतें और बढ़ जाएंगी।
निर्दलीय चुनाव जीतकर आए दुर्गापाल की इंदिरा हृदयेश से नजदीकी मानी जाती है ऐसे में यहां कांग्रेस को संसदीय चुनाव में कोई खास दिक्कत नहीं आएगी।
टिहरी में है कांग्रेस को भरोसा
टिहरी संसदीय क्षेत्र में पीडीएफ के दो विधायक हैं। यमुनोत्री विधानसभा से कैबिनेट मंत्री प्रीतम पंवार यूं तो उक्रांद से जीतकर आए हैं, लेकिन पार्टी में धड़ेबाजी के बाद वह किनारा कर चुके हैं। टिहरी संसदीय उपचुनाव में उन्होंने उक्रांद को समर्थन नहीं दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में पंवार ने उत्तरकाशी में खासा काम करवाया है, ऐसे में उनका पलड़ा किस और झुकता है यह कांग्रेस प्रत्याशी तय होने के बाद पता लगेगा।
टिहरी विधायक दिनैश धनै का कांग्रेस से पुराना नाता है, लेकिन सरकार में मंत्री नहीं बनाने से खासे नाराज हैं।
कितना कारगर रहेगा बसपा का करार
हरिद्वार संसदीय सीट से पीडीएफ में शामिल बसपा के तीन विधायक हैं। पार्टी का सरकार को समर्थन है, लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस बसपा का कोई करार नहीं होने है।
बसपा का हरिद्वार में अपना प्रत्याशी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में पीडीएफ की सरकार से नजदीकी होने चर्चा है। बसपा आलाकमान ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश और विधायक हरीदास का निलंबन किया है।
सुरेंद्र राकेश और हरिदास का पार्टी में भी खासा विरोध है, दोनों की सरकार से नजदीकी की शिकायतें पार्टी लीडरशिप तक पहुंचती रही हैं। उधर, पार्टी के तीसरे विधायक सरबत करीम अंसारी का अपने दोनों विधायकों के साथ कोई खास तालमेल नहीं है।